कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर की सीजेएम कोर्ट में आपराधिक मामला दर्ज करवाया गया है। यह केस वकील सुधीर ओझा की ओर से दर्ज कराया गया है।

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, पहलू खान लिंचिंग मामले में राजस्थान की अलवर कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले पर प्रियंका गांधी के ट्वीट को लेकर यह मामला दर्ज किया गया है। वकील सुधीर ओझा ने प्रियंका गांधी के खिलाफ यह केस दर्ज करवाया है।
बता दें कि, प्रियंका गांधी वाड्रा ने अलवर के बहरोड़ थाना क्षेत्र में दो साल पहले कथित गोरक्षकों द्वारा पीट-पीट कर मौत के घाट उतारे गए डेरी किसान पहलू खान की हत्या के मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने संबंधी अदालती फैसले को चौंकाने वाला बताया था।
Bihar: A criminal case registered against Congress leader Priyanka Gandhi Vadra in Muzaffarpur CJM Court by advocate Sudhir Ojha (in pic) for Priyanka's tweet on the recent judgment in Pehlu Khan lynching case (2017) of Alwar. pic.twitter.com/Ga0ppzVFsT
— ANI (@ANI) August 16, 2019
प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, “पहलू खान मामले में लोअर कोर्ट का फैसला चौंका देने वाला है। हमारे देश में अमानवीयता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और भीड़ द्वारा हत्या एक जघन्य अपराध है।” उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “राजस्थान सरकार द्वारा भीड़ द्वारा हत्या के खिलाफ कानून बनाने की पहल सराहनीय है। आशा है कि पहलू खान मामले में न्याय दिलाकर इसका अच्छा उदाहरण पेश किया जाएगा।”
राजस्थान सरकार द्वारा भीड़ द्वारा हत्या के खिलाफ कानून बनाने की पहल सराहनीय है। आशा है कि पहलू खान मामले में न्याय दिलाकर इसका अच्छा उदाहरण पेश किया जाएगा।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 16, 2019
बता दें कि, गोतस्करी के शक में 1 अप्रैल 2017 को कथित गोरक्षकों की भीड़ द्वारा पहलू खान की जमकर पिटाई की गई थी, डेयरी बिजनस करने वाले पहलू की 2 दिन बाद मौत हो गई थी। जब यह घटना हुई थी तब राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार थी और उस वक्त राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया थीं।
हरियाणी निवासी पहलू खान की भीड़ हत्या के इस मामले में कुल नौ आरोपियों में तीन नाबालिग हैं, जिनका मामला किशोर न्यायालय में चल रहा है। बालिग आरोपियों में विपिन यादव, रविंद्र कुमार, कालूराम, दयानंद, योगेश कुमार और भीम राठी शामिल थे, जिन्हें अदालत ने बुधवार को बरी कर दिया। अदालत का फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने कहा था कि वह इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी।