कोर्ट ने रद्द किया पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का गैर जमानती वारंट

0

पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के खिलाफ बुधवार(25 अक्टूबर) को जारी गैर जमानती वारंट को गुजरात की स्‍थानीय अदालत ने रद्द कर दिया है। उनके खिलाफ साल 2015 के एक मामले में गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।

file photo

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को महेसाणा जिले की एक अदालत ने हार्दिक पटेल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। महेसाणा के विसनगर की सेशन कोर्ट ने लगातार तीन तारीखों पर गैरहाजिर रहने के चलते बुधवार(25 अक्टूबर) को हार्दिक और उनके साथ आरोपी बनाए गए दूसरे लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया था।

मेहसाणा के जिस विसनगर की अदालत ने हार्दिक के खिलाफ वारंट जारी किया था, वह साल 2015 में हुए पाटीदार अनामत (आरक्षण) आंदोलन का प्रमुख गढ़ रहा था। 2015 में बीजेपी नेता ऋषिकेश पटेल के कार्यालय पर हार्दिक पटेल के समर्थकों ने हमला किया था, इसी मामले पर कोर्ट ने बुधवार को यह वारंट जारी किया था।

वारंट जारी होने के बाद बुधवार शाम को हार्दिक ने कहा था कि अगर पुलिस मुझे गिरफ्तार करना चाहती है तो मैं आत्‍मसमर्पण को तैयार हूं। हार्दिक अदालत में अपने 5 सहयोगियों के साथ पहुंचे थे।

गौरतलब है कि, गुजरात विधानसभा चुनाव में पाटीदार वोटर अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की निगाह पाटीदार युवा नेताओं पर लगी हुई है। गुजरात विधानसभा चुनाव जितना करीब आ रहा है उसी राज्य में राजनीतिक गहमा-गहमी तेज हो गई है।

बता दें कि माना जा रहा है कि इस बार कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) में कांटे की टक्कर है। लेकिन दोनों पार्टियों से अलग इस चुनाव में हार्दिक पटेल मुख्य केंद्र बिंदू बने हुए हैं।

हालांकि हार्दिक पटेल ने गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा ऐलान करते हुए बुधवार को कहा कि अगर उनके समर्थक कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं तो वह पूरी तरह स्वतंत्र हैं। ABP न्यूज से बातचीत में हार्दिक ने कहा कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का एकमात्र विकल्प कांग्रेस ही है।

उन्होंने कहा कि मैं पहले ही कह चुका हूं कि अगर मेरे पिता भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं तो लोगों को उन्हें वोट नहीं देना चाहिए। हार्दिक ने कहा कि काग्रेस राज्य में वास्तविक विकल्प है। वहीं मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हार्दिक पटेल ने गुजरात विधानसभा चुनाव में समर्थन देने के लिए कांग्रेस के सामने कई शर्तें रखी हैं।

 

Previous articleदिल्ली हाई कोर्ट ने सुनंदा पुष्कर मौत मामले में सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका को किया खारिज
Next articleDelhi High Court calls Subramanian Swamy’s PIL as political interest litigation