दलितों और मुस्लिमों को ‘देश विरोधी’ बताने वाली JNU की विवादित प्रोफेसर को बनाया गया ICSSR का सदस्य

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की विवादित प्रोफेसर अमिता सिंह उन 13 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद (ICSSR) के सदस्य के तौर पर चुना है। बता दें कि अमिता सिंह वही प्रोफेसर हैं, जिन्होंने पिछले साल अपनी इस कथित टिप्पणी से विवाद पैदा कर दिया था कि सभी दलित और मुस्लिम ‘देश विरोधी’ होते हैं।

फाइल फोटो: HT

समाज विज्ञान में शोध को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 1969 में ICSSR की स्थापना की थी। ICSSR संस्थानों एवं विद्वानों को अनुदान देने और समाज विज्ञान के क्षेत्र में शोध में प्रगति की समीक्षा करने का काम करता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पिछले महीने मानव विज्ञानी बृज बिहारी कुमार को ICSSR का अध्यक्ष नियुक्त किया था।

कुमार की नियुक्ति के बाद ICSSR में सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हुई। एक सूत्र ने बताया, ‘ICSSR के अध्यक्ष ने परिषद के सदस्यों के तौर पर चयन के लिए 13 नाम भेजे थे और मंत्रालय ने उन्हें मंजूरी दे दी है।’ जिन लोगों को परिषद का सदस्य चुना गया है, उनमें जेएनयू की प्रफेसर अमिता सिंह, दिल्ली यूनिवसर्टिी के प्रफेसर अश्विनी महापात्र, इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के मानद निदेशक राकेश सिन्हा और बिहार यूनिवसर्टी के कुलपति एच सी एस राठौड़ शामिल हैं।

जेएनयू के सेंटर ऑफ लॉ ऐंड गवर्नेंस की प्रमुख अमिता सिंह ने पिछले साल हुए राजद्रोह विवाद के दौरान कथित तौर पर यह बयान देकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि दलित और मुस्लिम ‘देश विरोधी’ होते हैं। अमिता ने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले में जेएनयू को नोटिस भी जारी किया था।

पुणे यूनिवसर्टी की प्रोफेसर शांतिश्री पंडित, प्रबंधन के प्रोफेसर पी कांगासभापति, अर्थशास्त्र के प्रोफेसर संजय सत्यार्थी, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के भाषा-विज्ञानी पंचानन मोहंती, महिला शिक्षाविद के एस खोब्रागडे, टी एस नायडू, पी वी कृष्णा भट और एच एस बेदी को ICSSR में सदस्य नियुक्त किया गया है।

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