गुजरात में हुए राज्यसभा चुनाव में अब तक के सबसे तगड़े मुकाबले में कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने आखिरकार जीत हासिल कर ली। पटेल ने बीजेपी के उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत को हरा दिया। इससे पहले मंगलवार(8 अगस्त) देर रात तक चले नाटकीय घटनाक्रम में चुनाव आयोग ने चुनाव नियमों का उल्लंघन करने पर कांग्रेस के दो असंतुष्ट विधायकों के वोट अमान्य कर दिये थे, इसके साथ ही कांग्रेसी खेमे में खुशी का माहौल दिखना शुरू हो गया।चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव पटेल को 44 वोट मिले, जबकि राजपूत को 38 वोटों से संतोष करना पड़ा। बता दें कि हाल ही में राजपूत राज्य विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक थे और पार्टी छोड़कर बीजेपी में आ गये थे।
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी इन चुनावों में जीतकर पहली बार राज्यसभा में प्रवेश किया है। उनके साथ मौजूदा राज्यसभा सदस्य और सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने भी अपनी जगह बरकरार रखी है। अधिकारी के अनुसार दोनों को 46-46 वोट मिले हैं। एक वक्त तो लगा कि अमित शाह ने मानो पटेल को हराने की ठान रखी है। लेकिन चुनावी नतीजों के बाद इस लड़ाई में कांग्रेस ही विजेता बनकर उभरी।
चुनाव जीतने की घोषणा के बाद अहमद पटेल ने कहा कि यह केवल मेरी जीत नहीं है। यह धनबल, बाहुबल के धड़ल्ले से इस्तेमाल और राज्य मशीनरी के दुरुपयोग की हार है। उन्होंने कहा कि मैं खुश हूं और अपनी पार्टी के नेतृत्व, अपने विधायकों और सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताना चाहता हूं, जिन्होंने एक परिवार की तरह काम किया। यह एक मुश्किल चुनाव था जिसमें हमें जीत मिली।
इस नाटकीय जीत के साथ पटेल पांचवीं बार उच्च सदन में पहुंचने में कामयाब हुए हैं। इससे पहले मतगणना शुरू होने के बाद कुछ मिनट के लिए रोक दी गई थी, जब कांग्रेस ने दावा कर दिया कि उसके दो विधायकों ने अनधिकृत लोगों को मतपत्र दिखाकर चुनाव नियमों की अवहेलना की।
अपने दो विधायकों की क्रॉस वोटिंग से नाराज कांग्रेस ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया और पोलिंग एजेंट को अपना बैलेट दिखाने वाले दोनों विधायकों का वोट रद्द करने की मांग की। अहमद पटेल को मिले 44 वोट
जवाब में बीजेपी भी चुनाव आयोग पहुंची और कांग्रेस की इस अर्जी को न मानने की अपील की। इन विधायकों ने बीजेपी के प्रत्याशी को वोट दिया था।
दोनों पार्टियों के चुनाव आयोग जाने का ये सिलसिला तीन बार चला और आखिरकार चुनाव आयोग ने कांग्रेस की मांग मानते हुए दोनों विधायकों के वोट रद्द कर दिए, जिसके बाद ही अहमद पटेल की जीत का रास्ता साफ हो गया। आयोग ने निर्वाचन अधिकारी से कांग्रेस विधायक भोलाभाई गोहिल और राघवजी भाई पटेल के मतपत्रों को अलग करके मतगणना करने को कहा।
आयोग के आदेश के अनुसार मतदान प्रक्रिया का वीडियो फुटेज देखने के बाद पता चला कि दोनों विधायकों ने मतपत्रों की गोपनीयता का उल्लंघन किया था। कांग्रेस ने चुनाव आयोग में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि उनके वोट रद्द किये जाएं, क्योंकि उन्होंने अनधिकृत लोगों को अपने मतपत्र दिखाए।