सुप्रीम कोर्ट ने सूफी संत पर टिप्पणी के मामले में टीवी समाचार एंकर अमीश देवगन के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर शुक्रवार (26 जून) को रोक लगा दी। बता दें कि, सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के खिलाफ कथित अपमानजनक बयान देने वाले ‘न्यूज 18 इंडिया’ के एंकर अमीश देवगन पर विभिन्न राज्यों में कई प्राथमिकी दर्ज करवाई गई हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायामूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करवाने वाले लोगों को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र सरकार को भी नोटिस जारी किए गए हैं जहां पर पत्रकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
एंकर अमीश देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने राहत की मांग की और कहा कि उनके मुवक्किल अपनी टिप्पणियों के लिए ट्वीट करके सफाई दे चुके हैं।
शीर्ष अदालत याचिका पर जुलाई के पहले हफ्ते में सुनवाई करेगी और तब तक देवगन के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। प्राथमिकी एवं शिकायतों में कहा गया है कि देवगन ने संत के लिए ‘लुटेरा’ शब्द का इस्तेमाल किया था और बाद में इसके लिए माफी मांग ली थी।
बता दें कि, अपने विवादित शो को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले ‘न्यूज 18 इंडिया’ के एंकर अमीश देवगन ने विश्व प्रसिद्ध अजमेर शरीफ के हजरत ख्वाजा गरीब नवाज को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था। इसके बाद वह सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए थे, लोग उनकी गिरफ्तारी की मांग करने लग गए थे।
सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करने और अपने खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की धमकी के बाद अमीश देवगन ने सार्वजनिक रुप से माफी मांग ली थी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “अपनी एक बहस में, मैंने अनजाने में ‘खिलजी’ को चिश्ती कह दिया। मैं ईमानदारी से इस गंभीर त्रुटि के लिए माफी मांगता हूं और यह सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के अनुयायियों के लिए दुख की बात हो सकती है, जिन्हें मैं सम्मान देता हूं। मैंने भी पहले उनकी दरगाह पर आशीर्वाद लिया है। मुझे इस त्रुटि पर खेद है।”