मुकेश अंबानी के TV 18 ने अर्नब गोस्वामी के नए चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, जानें क्या है पूरा मामला

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अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में अयोध्या विवाद पर एक फर्जी ‘सुपर एक्सक्लूसिव’ रिपोर्ट के साथ अपना नया हिंदी चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ लॉन्च किया। ‘फेक न्यूज’ के सहारे रिपब्लिक भारत ने मीडिया जगत में धमाकेदार इंट्री की है। रिपब्लिक भारत उर्फ आर भारत लांच होते ही टीआरपी दौड़ में छठें नंबर पर आ गया है। रिपब्लिक ने पहले ही हफ्तें में 6 बड़े न्यूज चैनलों को पीछे छोड़ दिया है।

अब रिपब्लिक भारत से आगे सिर्फ पांच चैनल ही रह गए हैं। अर्नब गोस्वामी सहित रिपब्लिक भारत की टीम ने दावा किया है कि बहुत जल्द ही उन पांच चैनलों को भी पिछड़ देंगें। हिंदू-मुस्लिम एजेंडे पर पत्रकारिता करते हुए जी न्यूज और सुदर्शन न्यूज चैनल को मात देने वाले रिपब्लिक भारत चैनल ने लगातार विवादास्पद मुद्दे उठाए और खुद योजनाबद्ध तरीके से विवादो को जन्म दिया।

इस बीच मशहूर भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी TV18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से रिपब्लिक भारत के गलत शैली वर्गीकरण के खिलाफ शिकायत की है। आरोप है कि गोस्वामी के एआरजी आउटलेयर एशियानेट न्यूज के स्वामित्व वाले हिंदी समाचार चैनल को इसकी घोषित शैली के बाहर रखा जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी शिकायत में टीवी18 ने आरोप लगाया है कि हम पूरी तरह से मानते हैं कि उक्त चैनल को जानबूझकर और बदनीयत से श्रेणी से बाहर रखा गया है ताकि रिपब्लिक भारत को अच्छी रेटिंग प्राप्त करने और दर्शकों की संख्या बढ़ाने में सक्षम बनाया जा सके। शिकायत की पुष्टि करते हुए ट्राई प्रवक्ता ने कहा है कि नियामक इस मुद्दे की जांच कर रहा है।

शिकायत में कहा गया है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि जिस श्रेणी में रिपब्लिक भारत को रखा जा रहा है, उनमें बेहतर व्यूअरशिप और रेटिंग है। आरोप है कि रिपब्लिक भारत को गैर-हिंदी समाचार शैलियों में रखकर एक अनुचित और अनुचित लाभ दिया जा रहा है। टीवी 18 का कहना है कि यह ट्राई के प्रसारण नियमों का उल्लंघन है।

‘रिपब्लिक भारत’ के झूठ का पर्दाफाश

बता दें कि पिछले दिनों ‘रिपब्लिक भारत’ ने 1990 में अयोध्या में हुए गोलीकांड को लेकर अपने कथित स्टिंग में एक अधिकारी से बात की थी। चैनल ने दावा किया था कि रामजन्मभूमि थाने के तत्कालीन एसएचओ वीर बहादुर सिंह ने सनसनीखेज दावा किया है कि कारसेवकों की मौत का जो आंकड़ा बताया गया था, उससे कहीं ज्यादा कारसेवकों की मौत हुई थी। चैनल ने एसएचओ वीबी सिंह के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बार-बार ‘नरसंहार’ शब्द का इस्तेमाल किया। चैनल अपने स्टिंग को अगले दिन अपने अंग्रेजी चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ पर भी चलाया।

रिपब्लिक भारत ने अपने वीडियो में दावा किया है कि उस वक्त के (अक्टूबर-नवंबर 1990) अयोध्या में रामजन्म भूमि थाने के इंचार्ज वीबी सिंह का उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन किया है। स्टिंग में रिपोर्टर ने ऐसा जताया है कि मानो वह पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्ष गवाह हों। जबकि हकीकत यह है कि खुद वीबी सिंह इसी स्टिंग में यह स्पष्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि वह उस वक्त राम जन्मभूमि थाने का इंचार्ज नहीं थे, जब गोलीबारी की घटना हुई थी। चैनल के स्टिंग में खुद वीबी सिंह ने बताया कि जब गोलीबारी की घटना हुई थी, उस वक्त वह एसएसपी कार्यालय में रीडर थे, ना की थाना इंचार्ज।

लेकिन रिपब्लिक भारत का रिपोर्टर बार-बार उसे थाना इंचार्ज (एसएचओ) बताने पर तुला रहा। वीडियो में वह खुद कह रहा है कि मैं एसएसपी के दफ्तर में रीडर था। सिंह ने कहा, (पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें) “जब गोलीबारी हुई, तो कोतवाल (पुलिस अधिकारी) भाग गए, थाना प्रभारी (एसएचओ) भी चले गए, वहां रिपोर्ट दर्ज करने वाला कोई नहीं था। उस समय, मैं READER, SSP था। तब डीएम और एसएसपी ने मुझे बुलाया।”

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