पिछले साल जून में जम्मू-कश्मीर में शहीद सेना के जवान औरंगजेब की हत्या मामले में नया मोड़ आ गया है। आतंकियों द्वारा औरंगजेब के अपहरण और फिर उसकी हत्या के मामले में इंडियन आर्मी ने 44 राष्ट्रीय राइफल्स के तीन जवानों को हिरासत मे लेकर उनसे पूछताछ कर रही है। पिछले साल जून में आतंकवादियों द्वारा सैनिक औरंगजेब के अपहरण और हत्या मामले में हिरासत में लिए गए इन तीनों राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों की कथित संलिप्तता को लेकर पूछताछ की जा रही है।
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया कि सेना द्वारा हिरासत में लिए गए तीनों जवानों पर आतंकियों का खबरी होने का शक है। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों ने कथित तौर पर औरंगजेब से जुड़ी जानकारियां आतंकवादियों को दी थी। इन्हीं जानकारियों के आधार पर औरंगजेब को घर जाते वक्त आतंकी अगवा करने में कामयाब हुए। एक्सप्रेस के मुताबिक, तीनों जवानों की पहचान आबिद वानी, तजामुल अहमद, और आदिल वानी के तौर पर हुई है।
इनमें से दो जवान पुलवामा और एक कुलगाम का रहने वाला है। इनकी भूमिका के बारे में तब पता चला जब औरंगजेब की हत्या की जांच चल रही थी। बता दें कि औरंगजेब की जून 2018 में हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद उन्हें उनकी बहादुरी के लिए पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मरनोपरांत शौर्य चक्र से नवाजा गया था। जबकि हाल ही दो दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में औरंगजेब के पिता बीजेपी में शामिल हुए थे।
हिरासत में लिए गए आबिद वानी के भाई के साथ मारपीट!
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए तीन आरोपी जवानों में से एक आबिद वानी के भाई तवसीफ अहमद (27) के साथ कथित तौर पर मारपीट का मामला सामने आया है। अखबार के मुताबिक, राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों पर अहमद के साथ कथित तौर पर मारपीट करने का आरोप लगा है। कई जगह चोट आने के कारण तवसीफ को पहले पुलवामा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां हालात बिगड़ने पर उन्हें श्रीनगर स्थित श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल रेफर कर दिया गया था। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर बताया है। रक्षा प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने अखबार से बातचीत में घटना के ब्यौरे की छानबीन करने की बात कही है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को महाराजा हरि सिंह अस्पताल जाकर आतंकियों के खबरी होने के आरोपी आबिद वानी के घायल भाई अहमद से मुलाकात की। मुफ्ती ने बताया कि वह इस घटना के बाबत कोर कमांडर से बात करेंगी। उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि राज्यपाल (सत्यपाल मलिक) इस मामले पर संज्ञान लेंगे। उनके मुताबिक, तवसीफ का भाई अभी भी लापता है, जिसके बारे में कोई खबर नहीं है।
पिछले साल जून में हुई थी औरंगजेब की हत्या
बता दें कि 14 जून 2018 को जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की कायराना हरकत देखने को मिली थी। 44 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान औरंगजेब जून में ईद के मौके पर अपने घर जा रहे थे, तभी आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया और बाद में उवकी निर्मत तरीके से हत्या कर दी थी। औरंगजेब ईद मनाने के लिए सुबह अपने घर राजौरी जा रहे थे कि उसी दौरान पुलवामा के कालम्पोरा से आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया। पुलिस और सेना के संयुक्त दल को औरंगजेब का शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु गांव में मिला था, उनके सिर और गर्दन पर गोलियों के निशान थे। उस दौरान औरंगजेब शोपियां के शादीमार्ग स्थित 44 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे।