ब्रिटिश कन्सल्टिंग कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा पांच करोड़ यूजर्स की जानकारी चुराने के बाद सोशल मीडिया के अग्रणी मंच फेसबुक की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इसके साथ ही फेसबुक पर साख का संकट भी मंडरा रहा है। डाटा लीक मामले में यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की संसद के बाद अब अमेरिका में भी फेसबुक के खिलाफ इस संबंध में जांच शुरू हो गई है। इस बीच भारत ने भी बुधवार (21 मार्च) को फेसबुक और उसके सीईओ मार्क जुकरबर्ग को कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए डेटा का दुरुपयोग करने को लेकर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
इसी बीच विश्वभर में विवाद बढ़ता देख पहली बार फेसबुक के मुखिया व सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने चुप्पी तोड़ी है। जुकरबर्ग ने फेसबुक पर पोस्ट लिखा है और अपनी गलती को स्वीकार किया है। साथ ही उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी सफाई दी और कहा कि कंपनी ने इस मामले में कई कदम उठाए हैं और भी सख्त कदम उठा सकती है।जुकरबर्ग ने कहा कि इस कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी द्वारा किए गए धोखाधड़ी के लिए फेसबुक हजारों एप्प की जांच करेगा। डेटा लीक पर बवाल के बाद जुकरबर्ग ने फेसबुक पोस्ट के जरिए सफाई दी है।
जुकरबर्ग ने गलती मानते हुए कहा कि निश्चित तौर पर फेसबुक यूजर्स की जानकारियां लीक हुई हैंं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यूजर्स के डेटा की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। जुकरबर्ग ने यह भी साफ शब्दों में जाहिर किया कि डेटा लीक होना विश्वास में सेंध लगने जैसा है। उन्होंने कहा कि डेटा लीक कैसे हुआ यह समझने की कोशिश कर रहा हूं। इसके अलावा यह सुनिश्चित करने की भी कोशिश करेंगे कि दोबारा ऐसा न हो सके।’ उन्होंने कहा कि आपके डेटा की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। यदि हम ऐसा नहीं कर सकते तो हमें आपके लिए काम करने का हक नहीं है।
फेसबुक के मुखिया ने इस पोस्ट में कहा कि फेसबुक को मैंने शुरू किया था, इसके साथ अगर कुछ भी होता है तो इसकी जिम्मेदारी मेरी ही है। हम अपनी गलतियों से सीखने की कोशिश करते रहेंगे, हम एक बार फिर आपका विश्वास जीतेंगे।हालांकि, उन्होंने कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका से जुड़े इस विशेष मुद्दे को आज के नए ऐप के साथ नहीं होना चाहिए, मगर अतीत में जो हुआ, उसे बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इस अनुभव से हम अपने मंच को आगे सुरक्षित करने के लिए सबक लेंगे और अपने फेसबुक समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति के लिए अधिक सुरक्षित बनाएंगे।
क्या है मामला?
बता दें कि ब्रिटिश डेटा विश्लेषण कंपनी, कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने पांच करोड़ फेसबुक उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा बिना उनकी मंजूरी के चुरा लिए हैं और उसका उपयोग राजनेताओं की मदद के लिए किया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रेक्सिट अभियान शामिल हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान मतदाताओं को डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रभावित करने के लिए फेसबुक के पांच करोड़ उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारियों का दुरुपयोग किया था। इस मामले के सामने आने के बाद फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका दोनो को यूरोपीय संघ, ब्रिटेन समेत अमेरिका में भी कानूनी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों कंपनियां इस मामले को लेकर भारी आलोचना झेल रहीं हैं।



















