उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा विधानसभा में मिले संदिग्ध पदार्थ को खतरनाक विस्फोटक (PETN) बताने वाले फॉरेंसिक साइंस लैबरेटरी के निदेशक डॉ. श्याम बिहारी उपाध्याय को निलंबित कर दिया गया है। उपाध्याय पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा में पीईटीएन बरामदगी की भ्रामक रिपोर्ट दी थी। गौरतलब है कि 12 जुलाई को यूपी विधानसभा में मिले पाऊडर को विस्फोटक बताए जाने पर हड़कंप मच गया था।
PHOTO: TOIदरअसल, विधानसभा में 12 जुलाई को मिला संदिग्ध पाउडर विस्फोटक था ही नहीं। खुद योगी सरकार की ओर से सोमवार(4 सितंबर) को जारी एक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। हालांकि, पिछले दिनों ही मीडिया में खबर आई थी कि एक लैब ने इस बात की पुष्टि की है कि विधानसभा में बरामद वो विस्फोटक पीईटीएन (पेन्ट्रा एरायथ्रिटॉल टेट्रानाइट्रेट) का पाउडर नहीं था।
इस मामले में अब एफएसएल के निदेशक शिव बिहारी उपाध्याय को बरामद पदार्थ के बारे में गलत, गुमराह करने वाली, अपूर्ण और अपुष्ट रिपोर्ट देने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, डीजीपी मुख्यालय की ओर से उपाध्याय के खिलाफ निलंबन की सिफारिश किए जाने के बावजूद गृह विभाग पिछले एक महीने से उनकी फाइल को दबाए बैठा था और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी।
White powder found in UP assembly: State Forensic Science Lab Director Shyam Bihari Upadhyay suspended for giving incorrect information
— ANI UP (@ANINewsUP) September 4, 2017
शासन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच में एफएसएल के निदेशक ने विस्फोटक की जांच के लिए जिस किट का प्रयोग किया वह एक्सपायर हो चुकी थी। इसके बावजूद उन्होंने बिना अन्य जांच कराए भ्रामक जानकारी सरकार और मीडिया को उपलब्ध कराई। डीजी टेक्निकल महेंद्र मोदी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ था, जिसके बाद उन्होंने डॉयरेक्टर के निलंबन की सिफारिश की थी।
मामले की जांच कर रही एनआईए ने हैदराबाद स्थित सीएफएसएल से इसकी जांच कराई तो पता चला कि यह सिलिकन ऑक्साइड है। यह कोई विस्फोटक नहीं है बल्कि इसका प्रयोग कांच की सफाई आदि में किया जाता है। गृह विभाग के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि पदार्थ की जांच ऐसे व्यक्ति ने की, जो इसका विशेषज्ञ नहीं है।
बता दें कि 12 जुलाई को विधानसभा में कार्यवाही के दौरान विस्फोटक बरामद होने पर हड़कंप मच गया था। 14 जुलाई को सार्वजनिक रूप से योगी सरकार ने दावा किया था कि वो पीईटीएन का खतरनाक पाउडर है। यूपी विधानसभा में विस्फोटक मिलने के बाद विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे एक आतंकी साजिश का हिस्सा बताया था। उन्होंने इस घटना की जांच एनआईए से कराने की बात कही थी।