भारत में भष्ट्राचार एक प्रमुख समस्या है, लेकिन उसके बाद भी देश की जनता को वर्तमान सरकार से काफी उम्मीदे हैं। शायद इसी लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने गत वर्ष 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी। नोटबंदी की घोषणा के असर से खासकर टिकाऊ उपभोक्ता सामान उद्योग में बड़ी गिरावट के बीच दिसंबर 2016 में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) एक साल पहले इसी माह की तुलना में 0.4 प्रतिशत कम रहा। औद्योगिक क्षेत्र का यह चार महीने का सबसे खराब प्रदर्शन था।
लेकिन नोटबंदी के बाद सरकार ने दावा किया था कि डिजिटल लेने देन में भारी बढ़ोतरी होगी। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार क्रेडिट और डेबिट कार्डों के जरिये लेनदेन में मात्र सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इस दौरान कुल डिजिटल लेनदेन 23 प्रतिशत बढ़ा है। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने संसदीय समिति को यह जानकारी दी।
नोटबंदी और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव पर संसद की वित्त पर स्थायी समिति के समक्ष कई मंत्रालयों के अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण दिया। ख़बरों के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि सभी माध्यमों से डिजिटल लेनदेन नवंबर, 2016 के 2.24 करोड़ से 23 प्रतिशत बढ़कर मई, 2017 में 2.75 करोड़ हो गया। सबसे अधिक बढ़ोतरी यूपीआई से लेनदेन में हुई, यह नवंबर, 2016 के 10 लाख प्रतिदिन से बढ़कर मई, 2017 में तीन करोड़ प्रतिदिन पर पहुंच गया।
ख़बरों के अनुसार, सरकारी अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार आईएमपीएस या तत्काल भुगतान सेवा के जरिये लेनदेन इस अवधि में 12 लाख से बढ़कर 22 लाख हो गया। यह इलेक्ट्रानिक तरीके से धन स्थानांतरण सेवा है। सबसे कम वृद्धि प्लास्टिक कार्डों के जरिये लेनदेन से हुई। नवंबर, 2016 के 68 लाख से यह इस साल मई तक मात्र सात प्रतिशत वृद्धि के साथ 73 लाख तक पहुंचा।
वहीं दूसरी और बता दें कि, नोटबंदी की घोषणा के बाद भारत में 11 अरबपति कम हो गए हैं। हालांकि, इसके बावजूद मुकेश अंबानी 26 अरब डालर की संपत्ति के साथ देश में सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। मंगलवार(7 मार्च) को जारी एक अध्ययन में यह आंकड़ा सामने आया था।