राष्ट्रपति चुनाव में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीए) के उम्मीदवार का समर्थन किए जाने से कांग्रेस और जेडीयू के बीच गहरा विवाद संभवत: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हस्तक्षेप की वजह से समाप्त हो गया है। जानकारी के मुताबिक, राहुल के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से नीतीश कुमार के खिलाफ नहीं बोलने का निर्देश दिए हैं।
जेडीयू ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाते हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ होने के संकेत दिए हैं। विपक्ष ने उपराष्ट्रपति पद के लिए भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है। इस दिशा में एक बार फिर से कोशिशें शुरू हो गई हैं। खबरों की मानें तो आगामी 11 जुलाई को संसद भवन की लाइब्रेरी बिल्डिंग में एक बार पूरे विपक्ष के जुटने के आसार है। सुबह 11 बजे का समय इस मीटिंग के लिए रखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक उस दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष अलग से नीतीश कुमार से मुलाकात कर सकते हैं। इस बारे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का कहना था कि हम लोग 11 जुलाई को इस मुद्दे पर मिल रहे हैं। जहां हम उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी पर चर्चा करेंगे।
गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल आगामी 10 अगस्त को खत्म हो रहा है। 5 अगस्त को इस पद को लेकर चुनाव है। मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नीतीश कुमार का मजबूती से पक्ष लेते हुए अपने पार्टी के नेताओं से जेडीयू प्रमुख की आलोचना करने से दूर रहने का निर्देश दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राहुल ने बैठक में चौधरी को नीतीश के खिलाफ बयान जारी करने वाले पार्टी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए। बता दें कि जिस समय कांग्रेस और जेडीयू में विवाद गहराया था, राहुल देश के बाहर थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने नीतीश कुमार पर ‘बिहार की बेटी’ मीरा कुमार की हार सुनिश्चित करने के लिए आगामी 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का समर्थन करने का आरोप लगाया था।
आजाद ने नीतीश पर प्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए कहा था कि जो एक विचारधारा रखते हैं वह एक निर्णय लेते हैं, जबकि जिनकी कई विचारधारा होती है वह अलग-अलग निर्णय लेते हैं। आजाद के इस टिप्पणी के बाद प्रदेश के कुछ कांग्रेस नेताओं ने भी जेडीयू प्रमुख पर वार किया था।
नीतीश ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा था, ‘बिहार की बेटी’ को हार के लिए क्यों चुना गया। यूपीए सरकार के कार्यकाल में दो बार अवसर आए थे, उस समय क्यों नहीं उन्हें उम्मीदवार बनाया। आजाद की ‘एक विचारधारा’ वाली टिप्पणी पर नीतीश ने पलटवार करते हुए कहा कि वह किसी के ‘पिछलग्गू’ नहीं हैं।
नीतीश के एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का उनके व्यक्त्वि को लेकर समर्थन किए जाने पर बिहार की महागठबंधन के घटक दलों कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। राजनीतिक जीवन में नीतीश के साथ बेहतर संबंध रखने वाले राहुल के इस हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस और जेडीयू में मतभेद संभवत: समाप्त हो गए हैं।



















