इस महीने के शुरूआत में राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों की पिटाई में मारे गए पहलू खान के परिवार को गाय भेंट कर सद्भावना मंच के सदस्यों ने गाय के नाम पर पैदा किए जा रहे उन्माद का विरोध किया। स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने शनिवार(29 अप्रैल) को अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट कर इसकी जानकारी दी।
इस दौरान पहलू खान के घर गाय लेकर पहुंचे योगेंद्र यादव और सद्भावना मंच के सदस्यों ने उनके परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने अलवर की घटना में घायल हुए अन्य पीड़ितों से भी मुलाकात की। पहलू खान की मां से मुलाकात के बाद योगेंद्र यादव ने अपने फेसबुक वॉल पर इस बारे में एक पोस्ट लिखी।
अपने फेसबुक पोस्ट में योगेंद्र ने लिखा, ‘अलवर में गोरक्षकों की हिंसा की भेंट चढ़े पहलू खान की मां अंगूरी बेगम के आंसू अपने एकमात्र बेटे के गम में खत्म होने का नाम ही नही ले रहे हैं। अब मां की वेदना का तो कोई धर्म-मजहब है नहीं। काश कि पहलू खान के हत्यारे यह समझ पाते।’
उन्होंने आगे लिखा है, ‘सद्भावना मंच के साथियों ने पहलू खान के परिवार को एक गाय भेंट की है। मेवाती चिर काल से गोपालक रहे हैं। इसका उनके धर्म-मजहब से कुछ लेना-देना नहीं है, लेकिन देश में फैलाए जा रहे उन्माद का सिर्फ एक ही मकसद है, धर्म-मजहब के बीच इतनी गहरी खाई खोद दो कि देश की सदियों की परम्पराएं धाराशायी हो जाएं।’
उन्होंने आगे लिखा है, ‘फैसला हमें करना है – क्या हम अपने देश की प्यार-सौहार्द की परंपरा को संभालेंगे या धर्म के नए ठेकेदारों के शोर को नई परंपरा बनायेंगे?’ इसके पहले शनिवार को सुबह योगेंद्र यादव ने फेसबुक और ट्विटर पर इस बात की जानकारी दी थी कि वह पहलू खान के परिवार को गाय भेंट करने जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, राजस्थान के अलवर के बहरोड़ थाना क्षेत्र में कथित गोरक्षकों की भीड़ द्वारा गाय लेकर जा रहे मुस्लिम समुदाय के 15 लोगों पर किए गए हमले में बुरी तरह जख्मी 55 वर्षीय पहलू खान नाम की मौत हो गई थी। मेवात जिले के नूंह तहसील के जयसिंहपुर गांव के रहने वाले पहलू खान एक अप्रैल को अपने दो बेटों और पांच अन्य लोगों के साथ जब गाय खरीदकर लौट रहे थे, तब राजस्थान के बहरोड़ में कथित गोरक्षों ने गो-तस्करी का आरोप लगाकर उन लोगों की जमकर पिटाई की।
भीड़ के हमले में अन्य लोगों के साथ बुरी तरह से पिटाई के शिकार हुए 55 साल के पहलू खान ने 3 अप्रैल को अस्पताल में दम तोड़ दिया। जबकि, बाद में मिले दस्तावेजों से साफ होता है कि उनके पास गाय ले जाने के दस्तावेज भी थे। इन रसीदों में इन लोगों द्वारा जयपुर नगर निगम और दूसरे विभागों को चुकाए गए पैसों की रसीद है, जिसके तहत वे कानूनी रूप से गायों को ले जाने का हक रखते थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मारपीट करने वाले लोग हिंदू वादी संगठनों से जुड़े थे। हैरानी की बात ये है कि गोरक्षा के नाम भीड़ कुछ लोगों को मारती रही और पुलिस वहीं खड़ी होकर तमाशा देखती रही। वहीं, राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने इस मामले में विवादित बयान देते हुए कहा था कि ‘गोरक्षकों’ ने अच्छा काम किया, लेकिन लोगों की पिटाई कर उन्होंने कानून का उल्लंघन भी किया।