पहलू खान हत्याकांड: 23 पूर्व IAS अधिकारियों ने वसुंधरा राजे को लिखा पत्र, बोले- अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करे सरकार

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भारतीय प्रशासनिक सेवा के 23 पूर्व अधिकारियों ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मांग की है कि पहलू खान हत्याकांड मामले में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाकर सरकार के प्रति खोया हुआ भरोसा पुन: हासिल करे।वर्ष 1968 के सेवानिवृत्त पूर्व आईएएस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को भेजे यह पत्र में कहा है कि पहलू खान मामले के लिए जिम्मेदार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्होंने कोताही की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का काम स्थिति पर काबू पाने के प्रयास करने का था, उन जिम्मेदार लोगों ने गैर जिम्मेदाराना बयान देकर उग्र करने का काम किया है।

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पूर्व अधिकारियों ने पत्र में लिखा है कि पहलू खान राजस्थान से गोवंश लेकर वैध आवश्यक कागजात के साथ हरियाणा जा रहा था। दस्तावेजों में पशु मेले से खरीदी गए गोवंश की पर्ची भी उसके पास थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपियों की बिना देरी के गिरफ्तारी होनी चाहिए और गोरक्षा के नाम पर होने वाली घटनाओं को रोका जाना चाहिए।
इस पत्र में अरूणा राय, अरूण कुमार, नरेंद्र सिंह सिसोदिया, कोमल आनंद समेत 23 अधिकारियों के नाम है।

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, राजस्थान के अलवर के बहरोड़ थाना क्षेत्र में कथित गोरक्षकों की भीड़ द्वारा गाय लेकर जा रहे मुस्लिम समुदाय के 15 लोगों पर किए गए हमले में बुरी तरह जख्मी 55 वर्षीय पहलू खान नाम की मौत हो गई थी। मेवात जिले के नूंह तहसील के जयसिंहपुर गांव के रहने वाले पहलू खान एक अप्रैल को अपने दो बेटों और पांच अन्य लोगों के साथ जब गाय खरीदकर लौट रहे थे, तब राजस्थान के बहरोड़ में कथित गोरक्षों ने गो-तस्करी का आरोप लगाकर उन लोगों की जमकर पिटाई की।

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भीड़ के हमले में अन्य लोगों के साथ बुरी तरह से पिटाई के शिकार हुए 55 साल के पहलू खान ने 3 अप्रैल को अस्पताल में दम तोड़ दिया। जबकि बाद में मिले दस्तावेजों से साफ होता है कि उनके पास गाय ले जाने के दस्तावेज भी थे। इन रसीदों में इन लोगों द्वारा जयपुर नगर निगम और दूसरे विभागों को चुकाए गए पैसों की रसीद है, जिसके तहत वे कानूनी रूप से गायों को ले जाने का हक रखते थे।

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मारपीट करने वाले लोग हिंदू वादी संगठनों से जुड़े थे। हैरानी की बात ये है कि गोरक्षा के नाम भीड़ कुछ लोगों को मारती रही और पुलिस वहीं खड़ी होकर तमाशा देखती रही। वहीं, राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने इस मामले में विवादित बयान देते हुए कहा था कि ‘गोरक्षकों’ ने अच्छा काम किया, लेकिन लोगों की पिटाई कर उन्होंने कानून का उल्लंघन भी किया।

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