किसानों की आत्महत्या पर वेंकैया नायडू बोले- कर्जमाफी अब फैशन बन गया है

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देश भर के अलग-अलग राज्यों में कर्ज माफी को लेकर हो रहे किसानों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। कर्ज में डूबे लगातार हो रही किसान आत्महत्या पर केंद्रीय मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने किसानों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक बड़ा बयान दिया है।

photo- ANI

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वेंकैया नायडू ने गुरुवार (22 जून) को कहा कि कर्ज माफी अब फैशन बन गई है, कर्ज माफी होनी चाहिए लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में। यह कोई अंतिम समाधान नहीं है समस्या से निपटने का, हमें किसानों का ध्यान रखना होगा। ख़बरों के मुताबिक, वेंकैया नायडू ने यह बात मुंबई में शेयर मार्केट में देश के सबसे बड़े म्युनिसीपल बॉन्ड प्रोग्राम को लॉन्च करने के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने एयर इंडिया और स्मर्ट सिटी पर भी बात की।

वहीं समाचार एंजेसी ANI के मुताबिक, वेंकैया नायडू के इस बयान पर सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि पिछले तीन साल में 36-40, 000 किसानों ने आत्म्हत्या की है और आप कर्जमाफी को फैशन बता रहे हैं। ये सीधे-सीधे अन्नदाता का अपमान है।

बता दें कि, मध्य प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र में किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया है। महाराष्ट्र के कल्याण में नेवी के जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों ने गुरुवार(22 जून) को ठाणे-बदलापुर हाईवे पर जाम लगाकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों और पुलिस वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। साथ ही कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

बता दें कि 15 दिन के भीतर ही महाराष्ट्र के किसानों का यह दूसरा हिंसक आंदोलन है। इससे पहले बीजेपी शासित राज्य महाराष्ट्र में 1 जून से लेकर कई दिनों तक किसानों ने उग्र प्रदर्शन किया था। जिसके बाद राज्य सरकार को सीमांत और मझोले किसानों का 30,000 करोड़ रूपये का कर्ज माफ करने की घोषणा करनी पड़ी थी।

वहीं, मध्य प्रदेश में 1 जून से 10 दिन तक किसानों ने हिंसक प्रदर्शन किया था। इस दौरान मंदसौर में 6 जून को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई थी और कई अन्य किसान घायल हो गये थे।

इसके बाद किसान भड़क गये और किसान आंदोलन समूचे मध्य प्रदेश में फैल गया तथा और हिंसक हो गया था।गौरतलब है कि, 6 जून को मध्य प्रदेश के मंदसौर में शुरू हुए किसान आंदोलन में अब तक करीब 17 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सभी फसलों की उचित कीमत दिए जाने और कर्जमाफी की मांग कर रहे थे।

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