सर्जिकल स्ट्राइक के असली वीडियो सामने आने पर घमासान, कांग्रेस ने मोदी सरकार पर लगाया राजनीतिक फायदे के लिए सेना के इस्तेमाल करने का आरोप

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सर्जिकल स्ट्राइक का कथित असली वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जवानों के बलिदान का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। बता दें कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकियों के ठिकानों को सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए खत्म करने के भारत के दावे के करीब दो साल बाद ऑपरेशन का एक वीडियो सामने आया है। सर्जिकल स्ट्राइक सितंबर 2016 में की गई थी।

सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो बुधवार (27 जून) शाम कुछ समाचार चैलनों पर प्रसारित किए हैं। वीडियो में दिखाया गया है कि भारतीय सेना के जवान आंतकियों के बंकरों को तबाह करने के अलावा कुछ को मौत के घाट भी उतार दिया। वीडियो को लेकर टीवी चैनलों का दावा है, जिसे उन्होंने ऑफिशियल सोर्स से हासिल किया है, इसे मानव रहित ड्रोन से बनाया गया था। ड्रोन में थर्मल इमेजिंग (TI) कैमरों का इस्तेमाल किया गया। जिनके जरिए सेना आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन को अंजाम दे रही थी।

समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक कांग्रेस ने गुरुवार (28 जून) को मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 2016 में जम्मू एवं कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण कर वोट बटोरने का काम किया। कांग्रेस ने पिछले दो दशकों में किए गए इस तरह के सर्जिकल स्ट्राइक का ब्योरा पेश करते हुए कहा कि इस तरह के सर्जिकल स्ट्राइक देश में पहली बार नहीं हुए हैं।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सितंबर 2016 में हुए सर्जिकल स्ट्राइक का वीडिया जारी होने के बाद यह बयान दिया है। सुरजेवाला ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सशस्त्रबलों के 70 साल की बहादुरी और बलिदान से भरे इतिहास का अपने भद्दे बयान से अपमान किया है।

शाह ने सात अक्टूबर 2016 को कहा था कि भारतीय सेना ने 68 वर्षो में पहली बार एलओसी पार कर दुश्मनों पर कार्रवाई की है। सुरजेवाला ने कहा कि पिछले दो दशकों में अलग-अलग समय पर सर्जिकल स्ट्राइक की सटीकता भारतीय सशस्त्र बल के ढ़ संकल्प की विशेषता है। सुरजेवाला ने सितंबर 2016 से पहले हुए कई सर्जिकल स्ट्राइक का भी ब्योरा पेश किया।

सुरजेवाला ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारी सेना ने पिछले दो दशकों में विशेष रूप से वर्ष 2000 के बाद कई सर्जिकल स्ट्राइक की। 21 जनवरी 2000 को (नीलम नदी के पार नडाला एनक्लेव), 18 सितंबर 2003 (बरोह सेक्टर, पुंछ), 19 जून, 2008 (भट्टाल सेक्टर), 30 अगस्त से एक सितंबर 2011 (केल में नीलम नदी के पार शारदा सेक्टर), छह जनवरी 2013 (सावन पत्र चौकी), 27 से 28 जुलाई 2013 (नाजापीर सेक्टर), छह अगस्त 2013 (नीलम घाटी), 14 जनवरी 2014, 28 से 29 सितंबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक हुई।

बता दें कि 18 सितंबर, 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें कई जवान शहीद हो गए थे। उरी आतंकी हमले में शहीद जवानों का बदला लेने के लिए 28-29 सितंबर की मध्य रात्रि में सजिर्कल स्ट्राइक की गई थी। सीमापार जाकर की गई इस कार्रवाई में कम से कम 40 आतंकवादी मार गिराए गए थे और कई आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया था। तब के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रनबीर सिंह ने 29 सितंबर, 2016 को घोषणा की थी कि भारत ने पीओके के आसपास आतंकी पैड को खत्म करने के लिए सेना के जरिए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है।

 

 

 

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