जस्टिस कर्णन को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, 6 महीने तक जेल में रहना होगा

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कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सीएस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार(21 जून) को जमानत देने या सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने कर्णन की 6 महीने की जेल की सजा पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। जस्टिस कर्णन को अब 6 महीने जेल में रहना होगा।

C S Karnan
फाइल फोटो।

शीर्ष अदालत की दो जजों की बेंच ने कहा कि सात जजों की संविधान पीठ ने उन्हें छह महीने की सजा सुनवाई है। ऐसे में ये बेंच उस आदेश पर कोई सुनवाई नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी न्यायिक अनुशासन के तहत काम कर सकता है। अगर कोई भी राहत लेनी है तो मुख्य न्यायाधीश के सामने मामले को रखना होगा।

बता दें कि पश्चिम बंगाल सीआईडी ने 42 दिन से फरार चल रहे जस्टिस कर्णन को मंगलवार(20 जून) को तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार कर लिया। करीब एक महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की अवमानना के मामले में उन्हें छह महीने कारावास की सजा सुनाई थी।

सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कर्णन को मालुमीचमपट्टी के निजी रिसॉर्ट से शाम पौने सात बजे गिरफ्तार किया। 62 वर्षीय कर्णन हाईकोर्ट के पहले ऐसे सेवारत न्यायाधीश हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने कैद की सजा सुनाई है।

अधिकारी के मुताबिक, कर्णन ने गिरफ्तारी का जमकर विरोध किया और पुलिस से उनकी कहासुनी भी हुई। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कोलकाता पुलिस की तीन टीम पिछले तीन दिनों से चेन्नई से करीब 550 किलोमीटर दूर कोयम्बटूर में डेरा डाले हुई थी और उनके मोबाइल फोन कॉल के आधार पर उनका पता लगा लिया।

अधिकारी ने बताया कि उनके ठिकाने का पता लगाने में तमिलनाडु की पुलिस ने तकनीकी तौर पर सहयोग दिया।
आठ दिन पहले वह कानून के भगोड़े के रूप में सेवानिवृत हो गए और उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट में मौजूद नहीं होने के कारण परम्परागत रूप से विदाई नहीं दी गई। कर्णन हाई कोर्ट के ऐसे पहले न्यायाधीश हैं जो भगोड़ा के रूप में सेवानिवृत हुए।

भारत के प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली सु्प्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय पीठ ने कर्णन को नौ मई को अदालत की अवमानना के आरोप में छह महीने जेल की सजा सुनाई थी जब वह कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे।अदालत ने सजा पर रोक लगने की उनकी याचिकाओं को बाद में नामंजूर कर दिया था।

क्या है पूरा मामला?

  • 23 जनवरी: जस्टिस कर्णन ने पीएम मोदी को खुला पत्र लिखा। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 20 जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
  • 8 फरवरी: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ अवमानना का मामला खोला। उनकी न्यायिक शक्तियां छीन लीं।
  • 13 फरवरी: जस्टिस कर्णन और उनके वकील सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उपस्थित नहीं हुए।
  • 10 मार्च: सुप्रीम कोर्ट ने जज के खिलाफ वारंट जारी किया। अदालतों को आदेश दिया कि वह कर्णन के न्यायिक फैसलों पर कोई संज्ञान न लें।
  • 31 मार्च: जस्टिस कर्णन सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। ऐसे करने वाले वह पहले हाई कोर्ट जज थे। आरोपों पर जवाब देने के लिए उन्हें चार हफ्ते का वक्त दिया गया।
  • 1 मई: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि कर्णन की मानसिक हालत की जांच हो।
  • 4 मई: कर्णन ने अपनी मानसिक जांच करवाने से इनकार किया।
  • 9 मई: सुप्रीम कोर्ट ने कर्णन को अवमानना का दोषी माना। 6 महीने जेल की सजा दी। फैसले के बाद जस्टिस कर्णन फरार हो गए।
  • 20 जून: तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार।

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