सुप्रीम कोर्ट से वारंट जारी होने पर बोले जस्टिस कर्णन- ‘दलित होने के कारण उन्हें बनाया जा रहा है निशाना’

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा वारंट जारी किए जाने के बाद कल‍कता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने शुक्रवार(10 मार्च) को आरोप लगाया कि दलित होने के कारण उन्‍हें निशाना बनाया जा रहा है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्‍होंने कहा कि यह राष्‍ट्रीय और जातिगत मुद्दा है। एक दलित जज को सार्वजनिक रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है। यह अत्‍याचार है।

जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वारंट बिना जांच, सबूत और चर्चा के जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश मेरी जिंदगी और कॅरियर बर्बाद करने के लिए जानबूझकर जारी किया गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ शुक्रवार(10 मार्च) को जमानती वारंट जारी किया है।

साथ ही कोर्ट ने जमानती वारंट जारी करते हुए कहा कि गिरफ्तार अधिकारी के समक्ष 10 हजार रूपये का निजी मुचलका जमा करने का आदेश दिया। यह वारंट अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गैरहाजिर रहने के कारण जारी किया गया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने उन्हें 31 मार्च को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है।

पीठ ने 31 मार्च को होने वाली सुनवाई के समय न्यायमूर्ति कर्णन की शीर्ष अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से गिरफ्तारी वारंट की तामील करें। पीठ ने एक नोटिस के जवाब में न्यायाधीश द्वारा शीर्ष न्यायालय रजिस्ट्री को आठ मार्च को भेजे गये पत्र पर विचार करने से इनकार कर दिया।

भारतीय न्याय इतिहास में पहली बार किसी सिटिंग जज पर कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया गया है। बता दें कि पिछली सुनवाई में भी कर्णन स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई अवमानना कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुए। शीर्ष अदालत ने कोर्ट में पेश होने के लिए उन्हें तीन हफ्तों का वक्त दिया था। साथ ही जस्टिस कर्णन को कोई भी न्यायिक या प्रशासनिक काम करने पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ जस्टिस कर्णन पर अदालत की अवमानना मामले की सुनवाई कर रही है।शीर्ष न्यायालय की इस पीठ में न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति पी सी घोष और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ भी शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, जस्टिस कर्णन ने 23 जनवरी को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वर्तमान 20 जजों की लिस्ट भेजी थी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। जिसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस जेएस खेहर ने 7 फरवरी को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए इसे कोर्ट का अवमानना मानकर स्वत: सुनवाई करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को कर्णन के खिलाफ नोटिस जारी किया करते हुए पूछा था कि उनके इस पत्र को कोर्ट की अवमानना क्यों न माना जाए।

पहले भी विवादों में रहे हैं कर्णन

कर्णन का विवादों से पूराना नाता है, ये वही जज है, जिन्होंने साल 2015 में मद्रास हाईकोर्ट को तब मुश्किल में डाल दिया था, जब उन्होंने चीफ जस्टिस संजय के कौल के खिलाफ अवमानना का केस करने की धमकी दी थी। कौल को कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने का प्रस्ताव दिया है। करनन ने कौल पर काम न करने का आरोप लगाया था और दूसरे जज की शैक्षिक योग्यता पर सवाल खड़े किए थे।

विवादों में घिरे जज ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें जाति की वजह से भेदभाव का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस उन्हें दलित की वजह से प्रताड़ित कर रहे हैं। इसी क्रम में जब उनका ट्रांसफर हुआ तो करनन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ‘स्टे’ दे दिया। उन्होंने चीफ जस्टिस को सुझाव दिया कि वह उनके ‘न्यायिक क्षेत्र’ में दखल न दें। हालांकि, बाद में अपना रुख नरम करते हुए उन्होंने अपना ट्रांसफर स्वीकार कर लिया था।

 

 

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