घूस मामला: CBI के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को हाई कोर्ट से मिली राहत, 1 नवंबर तक गिरफ्तारी पर लगी रोक

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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (29 अक्टूबर) को सीबीआई को आदेश दिया कि वह अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ कार्यवाही पर एक नवंबर तक यथास्थिति बनाए रखे। अस्थाना को सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है। आपको बता दें कि इस समय देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) खुद सवालों के घेरे में आ गई है। सीबीआई के दो सीनियर अधिकारी एक दूसरे के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

(Photo Source: Rakesh Asthana / Facebook)

न्यायमूर्ति नजमी वजीरी की पीठ ने अस्थाना और सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार की याचिकाओं पर जवाब दाखिल नहीं करने को लेकर जांच एजेंसी पर सवाल उठाए। दोनों अधिकारियों ने रिश्वतखोरी के एक मामले में अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग की है।

समचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक हाई कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह दोनों अधिकारियों की याचिका पर एक नवंबर या उससे पहले जवाब दाखिल करे। सीबीआई के वकील ने न्यायालय को बताया कि जवाब देने में इसलिए देर हुई क्योंकि केस से जुड़ी फाइलें केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के पास भेजी गई हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने जवाब दाखिल करने के लिए और वक्त भी मांगा।

दरअसल, मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ दर्ज एक मामले में जांच अधिकारी रहे देवेंद्र कुमार को कारोबारी सतीश सना का बयान दर्ज करने में फर्जीवाड़े के आरोप में 22 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। सतीश ने इस मामले में राहत पाने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया है।

हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर को सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह अस्थाना के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर यथास्थिति बनाए रखे। अस्थाना ने रिश्वतखोरी के आरोपों में अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी है।

क्या है मामला?

आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच पिछले कुछ दिनाें से आरोप-प्रत्यारोंपों का सिलसिला चल रहा था। वर्मा और अस्थाना के तल्ख रिश्तों की शुरुआत पिछले साल अक्टूबर में तब हुई जब सीबीआई डायरेक्टर ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर प्रमोट किए जाने पर आपत्ति जताई। अस्थाना ने बाद में वर्मा के खिलाफ मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के सहयोगी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया।

उधर, इस विवाद में उस समय नया मोड आया जब 15 अक्टूबर को सीबीआई ने अपने ही विशेष निदेशक अस्थाना, उप अधीक्षक देवेंद्र कुमार तथा कुछ अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। अस्थाना पर मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले के सिलसिले में तीन करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। कथित रिश्वत देने वाले सतीश सना के बयान पर यह केस दर्ज किया गया था। FIR में अस्थाना पर उसी सतीश बाबू सना से 3 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया, जिसका आरोप वह वर्मा पर लगा रहे थे।

इसके 4 दिनों बाद अस्थाना ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को खत लिखकर सीबीआई डायरेक्टर वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। सना रिश्वतखोरी के एक अलग मामले में जांच का सामना कर रहा है, जिसमें मांस कारोबारी मोइन कुरैशी की कथित संलिप्तता है। सीबीआई के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि इसके दो सबसे बड़े अधिकारी कलह में उलझे हैं।

अस्थाना ने प्राथमिकी दर्ज किए जाने के खिलाफ गत दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है जहां से उन्हें 29 अक्टूबर को अगली सुनवाई तक किसी तरह की कार्रवाई से राहत मिल गई। वहीं, देवेंद्र कुमार को सीबीआई ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया था। जांच एजेंसी में चल रहे आंतरिक कलह के कारण उस पर उठ रहे सवालों को देखते हुए उसकी साख बरकरार रखने के लिए सरकार ने मंगलवार रात अभूतपूर्व कदम उठाते हुए वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया।

 

 

 

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