RTI से खुलासा: छत्तीसगढ़, गुजरात और मध्य प्रदेश के चुनावों में चोरी हुई हैं EVM, फिर उठ सकता है सुरक्षा पर सवाल

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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में कथित गड़बड़ी को लेकर जारी विवाद के बीच ईवीएम की सुरक्षा को लेकर एक ऐसी खबर आई है, जिसे चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी पार्टियां हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं। दरअसल, सूचना का अधिकार(RTI) के तहत खुलासा हुआ है कि कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान EVM चोरी की सैकड़ों घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यह मामला सामने आने के बाद EVM की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। EVM challengeअंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, RTI के तहत चुनाव आयोग से मिली जानकारी से यह सनसनी खेज खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, आरटीआई कार्यकर्ता को चुनाव आयोग से मिले जवाब में पता चला है कि तीन राज्यों- छत्तीसगढ़, गुजरात और मध्य प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनावों में EVM चोरी के कम से कम 70 मामले हुए हैं।

अखबार के अनुसार, गुजरात में 2007 के एक मामले में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षक अपने एक साथी को EVM सौंपने के बाद लंच के लिए चला गया था। बाद में उसके लौटने पर वहां से ईवीएम मशीन गायब थी। फिलहाल, मामले की जांच की जा रही है और इस मामले में लाई डिटेक्टर टेस्ट भी किया जा चुका है। बता दें कि EVM की टेम्पर-प्रूफ टेक्नॉलजी को लेकर कुछ विपक्षी पार्टियां शंका जता चुकी हैं।

यह जानकारी सामने आने के बाद EVM की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि वह EVM की निगरानी के लिए कड़े प्रोटोकॉल का पालन करता है और इन मशीनों को लूटे जाने की स्थिति में इन्हें कबाड़ में डाल दिया जाता है और इनका दोबारा इस्तेमाल नहीं होता।

चुनाव आयोग ने दी सफाई

इस मामले में चुनाव आयोग के उप आयुक्त सुदीप जैन ने अखबार को बताया कि गुजरात को छोड़कर ये मामले चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों से लूट के हैं, चोरी के नहीं। नक्सलियों और असामाजिक तत्वों की ओर से चुनाव प्रक्रिया में रुकावट पैदा करने के लिए EVM को लूटा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी मामलों में कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

हालांकि, इन मामलों से चुनाव के दौरान और अन्य समय पर EVM/VVPAT को सुरक्षित रखने और उनके उपयोग को लेकर किए जाने वाले कड़े प्रशासनिक और सुरक्षा उपायों पर कोई संदेह पैदा नहीं होता। जैन ने TOI को बताया कि अगर एक EVM चोरी होती है तो वह सिस्टम में कभी वापस नहीं आती और इस वजह से इसमें गड़बड़ी करने और दोबारा इस्तेमाल का सवाल ही नहीं है।

 

 

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