PNB महाघोटाला: नीरव मोदी ने पहले कर्ज चुकाने से इनकार किया, अब ईडी के समन पर नहीं हुआ पेश, कहा- फुर्सत नहीं है

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पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 11,300 करोड़ रुपये के घोटाले के मुख्य सूत्रधार नीरव मोदी गुरुवार (22 फरवरी) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश नहीं हुए। ऐसे में ईडी ने नीरव मोदी के खिलाफ नया समन जारी किया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने कहा कि अस्थायी रूप से पासपोर्ट को निलंबित किए जाने और लंबित कारोबारी मामलों में व्यस्तता को नीरव ने अपने पेश नहीं होने की वजह बताया है। बता दें कि इसके पहले नीरव PNB को पत्र लिख कर पैसा लौटाने से भी इनकार कर चुके हैं।समाचार एजेंसी भाषा के हवाले से नवभारत टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग ऐक्ट (PMLA) के तहत नीरव मोदी को तलब किया था। अब मोदी को 26 फरवरी को मुंबई में केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि मोदी ने ईडी को भेजे ई-मेल में कहा है कि उसका पासपोर्ट अस्थायी रूप से निलंबित हो चुका है और वह मौजूदा घटनाक्रम को लेकर देश में जांच का सामना कर रहा है, ऐसे में पेश होना संभव नहीं है।

ईडी ने इस मामले में नीरव के मामा और गीतांजलि ज्वेलर्स के मालिक मेहुल चौकसी को शुक्रवार को पेश होने को कहा है। अगर चौकसी भी कल पेश नहीं होते हैं तो उन्हें भी नए सिरे से समन जारी किया जाएगा। इस बीच एजेंसी ने गुरुवार को मोदी और चौकसी की समूह कंपनियों से जुड़े 100 करोड़ रुपये के शेयरों, म्यूचुअल फंड और लक्जरी कारों को अपने कब्जे में ले लिया।

गौरतलब है कि कुछ साल पहले शराब कारोबारी भारतीय बैंकों को करोड़ों रुपये का चपत लगाकर भारत का भगौड़ा विजय माल्या ने भी अपने पेश नहीं होने की यही वजह बताई थी। बता दें कि नीरव अपने परिवार समेत जनवरी के पहले हफ्ते में ही देश छोड़कर भाग गया था। जांच एजेंसियों को भी अभी यह नहीं पता कि वह इस वक्त कहां हैं।

बता दें कि अभी पिछले दिनों नीरव मोदी ने पीएनबी को पत्र भेजकर कहा था कि मामले को सार्वजनिक कर दिए जाने से बात बिगड़ गई है और बैंक ने उससे बकाया वसूलने के सारे रास्ते बंद कर लिए हैं। 15-16 फरवरी को बैंक को लिखे पत्र में नीरव ने कहा था कि, ‘गलत तौर पर बताई गई बकाया राशि से मीडिया में होहल्ला हो गया और परिणाम स्वरूप तत्काल तौर पर खोज का काम शुरू हो गया और परिचालन भी बंद हो गया। इससे समूह पर बैंक के बकाया को चुकाने की हमारी क्षमता खतरे में पड़ गई है।’

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