कंधे पर बेटे का शव ले जाने का मामला: NHRC ने योगी सरकार को जारी किया नोटिस

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक अस्पताल द्वारा कथित तौर पर एंबुलेंस सेवा प्रदान करने से मना करने पर एक व्यक्ति द्वारा अपने कंधे पर अपने बेटे की लाश ढोने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने शुक्रवार(5 मई) को कहा कि उसने मीडिया में आई खबरों का स्वत: संज्ञान लिया है और राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें विशेष रूप से सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों द्वारा पेश की जाने वाले एंबुलेंस सेवाओं के बारे में सूचना प्रदान करने को कहा गया है।

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (1 मई) को यूपी के इटावा में एक पिता को कथित तौर पर अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण उसे अपने 13 वर्षीय बेटे को कंधे पर लादकर लेकर जाना पड़ा। विक्रमपुर गांव के रहने वाले उदयवीर अपने 14 वर्षीय बेटे पुष्पेंद्र का इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही पुष्पेंद्र ने दम तोड़ दिया था।


फिर भी पिता के अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। आरोप है कि शव को ले जाने के लिए इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर के साथ फार्मासिस्ट और वार्ड व्बॉय ने पीड़ित की कोई मदद नहीं की थी, जिसके कारण उदयवीर को बेटे का शव अपने कंधे पर लादकर ले जाना पड़ा था। उन्हें अस्पताल से न तो स्ट्रेचर की सुविधा मिली और न ही एंबुलेंस की।

योगी के राज में एक बाप के अपने बेटे की शव को कंधे पर ढोकर ले जाने की तस्वीर ने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। साथ ही उदयवीर की इस बेबसी ने ओडिशा के दाना मांझी की तस्वीर याद दिला दी, जिन्होंने अस्पताल से कोई सुविधा नहीं मिलने बाद अपनी पत्नी के शव को अस्पताल से करीब 10 किलोमीटर तक कंधे पर ढोते हुए लेकर जाना पड़ा था।

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