दुनियाभर में कुपोषण के शिकार सबसे अधिक बच्चे भारत में है, पर्याप्त भोजन तक नहीं मिल पाता मासूमों को

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बिहार और झारखंड में 6-23 साल के प्रत्येक दस में से 9 बच्चे पर्याप्त पोषण नहीं ले पाते है। यूनिसेफ की रिपोर्ट कहती है 5 वर्ष की आयु तक के सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे भारत में हैं, उसकी बड़ा हिस्सा झारखंड में है। जबकि ‘द लैनसेट जर्नल’ के एक अध्ययन ने भारत में रहने वाले बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति पर एक चौंका देने वाला रहस्योद्घाटन किया है, जिसमें 9.7 करोड़ बच्चे कम वजन से पीड़ित हैं। यह भी कहा गया है कि भारत में दुनिया में मध्यम और गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चों और किशोरों की संख्या सबसे अधिक है।

कुपोषण

यूके में इंपीरियल कॉलेज लंदन और विश्व स्वास्थ्य संगठन की अगुवाई में होने वाले अध्ययन में यह भी पाया गया कि भारत में 24.4 प्रतिशत लड़कियों और 39.3 प्रतिशत बच्चों को गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार पाया गया ये अपने उम्र के हिसाब से कम वजन के पाएं गए जो कि 2016 में 22.7 से बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि अनुमान है कि 19.2 करोड़ बच्चों में जिनमें 7.5 करोड़ लड़कियां और 11.7 करोड़ लड़के, दुनिया भर में दुनिया भर में मामूली या गंभीर रूप से कम वजन की समस्या कुपोषण के शिकार थे।

संयुक्त राष्ट्रबाल कोष के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे भारत में हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार और झारखंड में 6-23 साल के प्रत्येक दस में से 9 बच्चे पर्याप्त पोषण नहीं ले पाते।

जबकि इससे अलग महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में कुपोषण और बीमारियों से हो रही मौतों को गंभीरता से लेते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन मौतों को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए उठाए गए कल्याणकारी उपायों को लागू करे। साथ ही, सरकार जो भी करे, उसके बारे में समय-समय पर कोर्ट को जानकारी दे।

यालय ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई पर दिया है, जिसमें विदर्भ और महाराष्ट्र के अन्य आदिवासी इलाकों में कुपोषण व अन्य बीमारियों से हो रही मौतों की वृद्धि पर चिंता जताई गई है। याचिका में कहा गया कि इस साल अगस्त से अब तक 180 बच्चों की मौत हो चुकी है।

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