कुमार विश्वास का BJP पर निशाना, कहा- जो ‘धान’ की क़ीमत दे न सका, वो ‘जान’ की क़ीमत क्या जाने

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बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में इन दिनों फसलों के वाजिब दाम सहित अन्य मांगों को लेकर किसान आंदोलन कर रहे है। वहीं मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के दौरान छह किसानों की मौत पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। इसी बीच आम आदमी पार्टी (आप) नेता ने केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

कुमार विश्वास

AAP नेता कुमार विश्वास ने शनिवार(10 जून) को ट्वीट कर लिखा है, ‘भगवान का सौदा करता है, इंसान की क़ीमत क्या जाने? जो ‘धान’ की क़ीमत दे न सका, वो ‘जान’ की कीमत क्या जाने?’

गौरतलब है कि, इससे पहले कुमार विश्वास ने ट्वीट कर कहा था कि, ‘तीन नहीं 70 साल कहिए, 60 वर्ष कांग्रेस ने किसान के साथ जो किया उससे बुरा पिछले सालों में हुआ। सत्ता किसान का शोषण करती है विपक्ष उसकी भावनाओं का।’

गौरतलब है कि, मध्यप्रदेश में फसलों के वाजिब दाम सहित अन्य मांगों को लेकर किसान आंदोलन की आग में झुलस रहा है। जहां एक तरफ मध्य प्रदेश में शांति कायम करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल के दशहरा मैदान में शनिवार(10 जून) अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठ गए हैं। वहीं दूसरी और इसी आग में राज्य के कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने घी डालने वाला काम कर दिया है।

किसानों की कर्ज माफी को लेकर कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने कहा है कि किसानों की कर्ज माफी का कोई स्थान नहीं बनता, क्योंकि हमने किसी भी किसान से ब्याज नहीं लिया तो किस बात का कर्जा माफ होगा।

1 जून आंदोलन कर रहे हैं किसान

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने गुरुवार(1 जून) को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों की हड़ताल अभी भी जारी है। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी है।

किसानों की प्रमुख मांगे

  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
  • किसानों को फसलों का उचित दाम मिले और समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए।
  • आलू, प्याज सहित सभी प्रकार की फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
  • आलू, प्याज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्वंटल हो।
  • बिजली की बढ़ी हुई दरें सरकार जल्द से जल्द वापस लें।
  • आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
  • मंडी शुल्क वापस लिया जाए।
  • फसलीय कृषि कर्ज की सीमा 10 लाख रुपए की जाए।
  • वसूली की समय-सीमा नवंबर और मई की जाए।
  • किसानों की कर्ज माफी हो।
  • मध्यप्रदेश में दूध उत्पादक किसानों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध का भाव तय हो।

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