CAG की रिपोर्ट में हुआ खुलासा: अगर युद्ध हुआ तो 10 दिन में ही खत्‍म हो जाएगा भारतीय सेना का गोला-बारूद

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पाकिस्तान और चीन से लगातार तनाव की स्थिति से गुजर रहे भारत के हथियार और गोला बारूद को लेकर सरकारी खातों का ऑडिट करने वाली संस्था भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) (CAG) ने सेना के पास गोला-बारूद को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। जिसमें भारतीय सेना के गोला बारूद की कमी को लेकर चिंता जताई गई है।

भारतीय सेना

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने कहा है कि भारतीय सेना के पास बहुत से वॉर रिजर्व तो मात्र 10 दिन के लिए ही हैं। शुक्रवार(21 जुलाई) को सीएजी की ये रिपोर्ट संसद में पेश की गई, जिसमें कहा गया है कि सेना को युद्ध के लिए कम से कम 40 दिन का वॉर रिजर्व होना चाहिए। ये अलग बात है कि सेना ने इसे घटाकर 20 दिन का ‘ऑपरेशनल वॉर रिजर्व’ कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद सेना के पास बहुत से ऐसे महत्वपूर्ण गोलाबारूद हैं जो सिर्फ 10 दिन के लिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक जंग के लिए पूरी तरह से सक्षम होने में भारत को अभी दो साल का समय और लगेगा। पिछले 10 महीनों में हुए रक्षा सौदों को पूरा होने में दो साल का वक्त है, इसके बाद ही भारत के पास बेहतरीन हथियार और जरूरत के हिसाब से गोला बारूद मौजूद होंगे

रिपोर्ट में खराब गोलाबारूद के बारे में लिखा गया है कि इन्हें ठिकाने ना लगाने के चलते एम्युनेशन डिपो में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके साथ ही कहा गया है कि खराब गोलाबारूद का पता करने में भी काफी समय खराब किया जाता है।

ख़बरों के मुताबिक, सीएजी की रिपोर्ट में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि साल 2013 से सेना के हथियार की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ाने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है ऐसे में अगर किसी तरह से जंग की स्थिति पैदा हो जाए तो भारतीय सेना 10 दिन भी लगातार नहीं लड़ सकेगी।

गौरतलब है कि ये रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब डोकलम विवाद को लेकर चीन भारत को युद्ध की धमकी दे चुका है और पाकिस्तान की तरफ से रोज युद्धविराम का उल्लंघन हो रहा है। मौजूदा विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह जब थलसेना प्रमुख थे, तो उन्होनें भी सेना के तोपखाने में गोला बारूद की कमी का मुद्दा उठाया था।

गौरतलब है कि, 2015 में भी सीएजी ने रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। बता दें कि सेना के लिए पर्याप्त गोला-बारूद देने की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय की ही होती है जबकि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड इस गोला-बारुद का स्रोत केन्द्र और सेना को सप्लाई करने के लिए जिम्मेदार होता है।

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