देश के अलग-अलग हिस्सों से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की नक्सलियों से कथित संपर्क के आरोप में हुई गिरफ्तारी और बाद में उनको सुप्रीम कोर्ट द्वारा नजरबंद रखने के आदेश के एक दिन बाद शुक्रवार (31 अगस्त) को महाराष्ट्र पुलिस ने अपनी सफाई दी है। भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में महाराष्ट्र पुलिस के एडीजी परमबीर सिंह ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि जब हमारे पास उनके नक्सलियों के साथ संबंध होने की पुख्ता जानकारी मिली तभी हमने उनलोगों के खिलाफ कार्रवाई किया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा तथ्यों से साफ है कि उनके संबंध माओवादियों से हैं।
Photo: The Hinduएडीजी ने प्रेस कांफ्रेंस में सुधा भारद्वाज का कॉमरेड प्रकाश को लिखा एक पत्र सुनाया। उसके बाद एक और पत्र पढ़ते हुए कहा, ’30 जुलाई 2017 का एक पत्र है। रोना विल्सन का लेटर है। 8 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है जो एम-4 राइफल और एके-47 खरीदना था। ताकि पीएम मोदी को राजीव गांधी की तरह खत्म किया जा सके।’ आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सभी कार्यकर्ताओं को फिलहाल हाउस अरेस्ट रखने और मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर को करने का आदेश दे दिया है।
#WATCH A letter by Rona Wilson to comrade Prakash,"I hope you have received details of a requirement of Rs.8 crores for the annual supply of grenade launchers. Comrade Kishan&others have proposed steps to end Modi raj, like Rajiv Gandhi incident:PB Singh, ADG, Maharashtra Police pic.twitter.com/571vQHQJH2
— ANI (@ANI) August 31, 2018
जो चिट्ठी सामने आई है वह मानवाधिकारों की कानूनी लड़ाई लड़ने वाली कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज द्वारा लिखी गई बताई जा रही हैं। इन चिट्ठियों में आर्थिक सहायता देने की बात भी कही गई है। एक चिट्ठी कामरेड प्रकाश के नाम लिखी गई तो दूसरी कामरेड सुरेन्द्र के नाम। इन चिट्ठियों से यह जानकारी भी निकल कर सामने आती है कि इन इनके तार कश्मीर के अलगाववादियों और पत्थरबाजों से भी जुड़े हुए हैं। चिट्ठी में साफ-साफ लिखा है कि कामरेड अंकीत और कामरेड गौतम नवलखा कश्मीरी अलगाववादियों से सीधे संपर्क में हैं।
सुधा भारद्वाज ने चिट्ठी को बताया ‘फर्जी’
हालांकि, NDTV के मुताबिक सुधा भारद्वाज का कहना है कि जिस चिट्ठी के सहारे पुणे पुलिस उन पर आरोप लगा रही है वो पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी है। इस चिट्ठी के आधार पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों को फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने किसी को मोगा में कार्यक्रम आयोजित कराने के लिए 50,000 रुपये दिए और न ही वो किसी कॉमरेड प्रकाश को जानती हैं। सुधा भारद्वाज ने पुलिस पर मानवाधिकार के लिए काम कर रहे वकीलों और संस्थाओं को बदनाम करने और उनके काम में रुकावट डालने का भी आरोप लगाया है।
आपको बता दें कि पुणे पुलिस ने कई राज्यों में 28 अगस्त को प्रमुख वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों पर छापा मारा था और उनमें से पांच, वरवरा राव, वेरोन गोंजाल्विस, अरुण फेरारिया, सुधा भारद्वाज और गौतम नवालखा, को गिरफ्तार किया था। एल्गार परिषद की जांच को लेकर ये छापे मारे गये थे। इस परिषद की वजह से कथित रूप से अगले दिन कोरेगांव भीमा में हिंसा फैली थी।