दसॉल्ट प्रमुख के बयान ने की ‘जनता का रिपोर्टर’ के खुलासे की पुष्टि, मोदी सरकार ने अनिल अंबानी की मदद के लिए दिशानिर्देशों का किया था उल्लंघन

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राफेल डील को लेकर देश में जारी सियासी घमासान के बीच फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एरिक ट्रैपियर ने अनिल अंबानी की रिलायंस को पैसे देने की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार कर दिया है कि वह पैसा भारतीय अरबपति की कंपनी के पास गया था। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में ट्रैपियर ने कहा है कि हम रिलायंस में कोई पैसा नहीं लगा रहे हैं, बल्कि यह रकम संयुक्त उपक्रम (JV यानी दसॉल्ट-रिलायंस) में जा रहा है।

ANI को दिए इंटरव्यू में ट्रैपियर ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि अनिल अंबानी की रिलायंस को विमान निर्माण में अनुभव दिखाने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि डसॉल्ट के इंजीनियरों ने भारतीय कंपनी को लड़ाकू विमान बनाने का तरीका सिखाया गया था। उन्होंने कहा है कि अंबानी को हमने खुद चुना था। हमारे पास रिलायंस के अलावा भी 30 पार्टनर पहले से हैं। भारतीय वायुसेना सौदे का समर्थन कर रही है, क्योंकि उन्हें अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए लड़ाकू विमानों की जरूरत है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा, ‘हम रिलायंस में पैसा नहीं लगा रहे हैं। यह पैसा जॉइंट वेंचर में लगाया जाएगा। जहां तक इस सौदे की बात है, मेरे पास इंजिनियर्स और कामगार हैं, जो इसे लेकर काफी आगे हैं। वहीं दूसरी तरफ, हमारे पास रिलायंस जैसी भारतीय कंपनी है, जो इस जॉइंट वेंचर में पैसा लगा रही है और वह ये अपने देश को विकसित करने के लिए कर रहे हैं। इसलिए कंपनी (रिलायंस) यह भी जान सकेगी कि एयरक्राफ्ट कैसे बनाए जाते हैं।’

ट्रैपियर के बयान का तात्पर्य यह है कि भारतीय ऑफसेट पार्टनर को लड़ाकू विमानों के निर्माण में पूर्व अनुभव की कोई आवश्यकता नहीं थी। हालांकि पिछले महीने ‘जनता का रिपोर्टर’ ने खुलासा किया था कि रक्षा खरीद नीति 2016 के अनुच्छेद डी तहत धारा 4.1 में स्पष्ट कहा गया है कि योग्य उद्यमों के निर्माण में लगे भारतीय उद्यमों, संस्थानों व प्रतिष्ठानों या डीआरडीओ समेत योग्य सेवाओं के प्रावधान को भारतीय ऑफसेट पार्टनर के रूप में माना जाएगा। इसलिए भारतीय ऑफसेट पार्टनर के रूप में रिलायंस का चयन पॉलिसी स्पष्ट रूप से उल्लंघन था।

एरिक ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उन आरोपों को खारिज किया है कि जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि दसॉल्ट ने अनिल अंबानी की घाटे में चल रही कंपनी में 284 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। इन पैसों का इस्तेमाल नागपुर में एक जमीन खरीदने के लिए किया गया। ट्रैपियर ने एक इंटरव्यू के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा इस डील को लेकर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। ट्रैपियर ने कहा, ‘मैं झूठ नहीं बोलता। सच वही है जो मैंने पहले कहा है और जो बयान दिए हैं वह सच हैं। मेरी झूठ बोलने की आदत नहीं है। मेरे जैसे सीईओ के पद पर बैठकर आप झूठ नहीं बोलते हैं।’

आपको बता दें कि राहुल गांधी ने 2 नवंबर को दसॉल्ट सीईओ पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि दसॉल्ट ने अनिल अंबानी की कंपनी को 284 करोड़ रुपये दिए और अंबानी ने उसी पैसे से जमीन खरीदी। दसॉल्ट के सीईओ पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए राहुल ने तंज कसा था कि दसॉल्ट केवल पीएम मोदी को बचा रही है और जांच होगी, तो प्रधानमंत्री नहीं टिक पाएंगे। ट्रैपियर ने कहा कि उनके पास कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का अनुभव है और राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों की वजह से वह काफी निराश हुए हैं।

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