लाभ के पद का मामलाः अयोग्य घोषित किए गए AAP विधायकों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक चुनाव आयोग को उपचुनाव की अधिसूचना जारी न करने का दिया निर्देश

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लाभ के पद मामले में अयोग्य करार दिए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के 20 विधायकों को बुधवार (24 जनवरी) को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह इस मामले की अगली सुनवाई तक दिल्ली में उपचुनाव की कोई भी अधिसूचना जारी न करे। दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग समेत मामले से जुड़े सभी पक्षों से अपना पक्ष रखने को भी कहा है। Aam Aadmi Partyहाईकोर्ट ने यह फैसला आम आदमी पार्टी के उन आठ विधायकों की याचिका पर सुनाई जिन्हें लाभ का पद पाने के मामले में अयोग्य करार दिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी। अयोग्य घोषित किए गए AAP के आठ विधायकों ने मंगलवार (23 जनवरी) को हाईकोर्ट में चुनाव आयोग और राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ याचिका दी थी।

बता दें कि केंद्र ने अधिसूचना जारी कर 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया था। अदालत इन आठ विधायकों एवं उनके समर्थकों से खचाखच भरी थी। उनके अलावा अदालत कक्ष में पार्टी के कुछ वरिष्ठ सदस्यों सहित पत्रकार एवं विधायकों के वकील भी मौजूद थे। 19 जनवरी को चुनावी पैनल ने 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति से स्वीकृति मिल गई थी।

20 जनवरी को कानून एवं न्याय मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी कि राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) अधिनियम की धारा 15 (1) (ए) के तहत 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया है। निर्वाचन आयोग (ईसी) ने वकील प्रशांत पटेल की ओर से दायर याचिका पर फैसला करते हुए यह सिफारिश की थी।

पटेल ने आरोप लगाया था कि विधायक जैसे लाभ के पद पर रहते हुए 21आप विधायक संसदीय सचिव के पद पर आसीन हैं । उन्होंने इन 21 आप विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। बहरहाल राजौरी गार्डन से विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफा दे देने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई।

20 विधायकों की सदस्यता रद्द

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। लाभ के पद मामले में पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार (21 जनवरी) को चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी। चुनाव आयोग ने शुक्रवार (19 जनवरी) को लाभ के पद मामले में इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की थी।

ये सभी विधायक 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव पद पर थे, जिसे ‘लाभ का पद’ माना गया है। हालांकि, इस फैसले से केजरीवाल सरकार पर खतरा नहीं हैं। विधि मंत्रलय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है।

विधि मंत्रलय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया कि निर्वाचन आयोग द्वारा व्यक्त की गई राय के आलोक में, मैं, रामनाथ कोविंद, भारत का राष्ट्रपति, अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उक्त 20 सदस्यों को दिल्ली विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराता हूं।

आगामी 14 फरवरी को आम आदमी पार्टी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी के विधायकों की संख्या 66 से घटकर सीधे 46 पर आ गई है। अब 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने होंगे।

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Posted by Janta Ka Reporter on Saturday, January 20, 2018

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि आम आदमी पार्टी ने 13 मार्च 2015 को अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था। इसको लाभ का पद बताते हुए राष्ट्रपति से शिकायत की गई थी। इसमें इनकी सदस्यता को रद्द करने की मांग की गई थी। 19 जून को वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया था।

जिसके बाद राष्ट्रपति ने शिकायत चुनाव आयोग भेज दी थी। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से मामले की जांच का निर्देश दिया था। चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को ‘लाभ का पद’ मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 रह गई थी।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था। इसके बाद से इन सभी 21 विधायकों की सदस्यता पर और सवाल खड़े हो गए थे। आप के विधायक 13 मार्च 2015 से 8 सितंबर 2016 तक संसदीय सचिव के पद पर थे।

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