लाभ के पद का मामलाः AAP विधायकों की याचिका पर हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

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लाभ के पद मामले में अयोग्य करार दिए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व 20 विधायकों की याचिका पर मंगलवार (30 जनवरी) को दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से लिखित में जवाब देने को कहा है। इस मामले की सुनवाई अब अगले महीने 7 फरवरी को होगी। बता दें कि लाभ का पद मामले में अयोग्य घोषित किए गए ‘आप’ विधायकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नोटिफिकेशन को रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।Aam Aadmi Partyन्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (ईसी) को एक हलफनामा दायर कर लाभ के पद पर रहने वाले 20 आप विधायकों को अयोग्य ठहराने के उसके फैसले के तथ्यात्मक पहलुओं को बताने के लिये कहा। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना एवं न्यायमूर्ति चंद्र शेखर की खंडपीठ ने चुनाव पैनल को हलफनामा दायर करने के लिये कहा। इससे पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि दिल्ली विधानसभा से अपनी अयोग्यता को चुनौती देने वाली विधायकों की याचिका में लगाये गये कुछ आरोपों पर वह जवाब देना चाहता है।

आयोग ने अदालत को यह भी बताया कि यह संसदीय सचिवों के तौर पर नियुक्त 20 आप विधायकों को अयोग्य ठहराने के संबंध में राष्ट्रपति को दी गई अपनी राय पर विश्वास करेगा। संक्षिप्त कार्यवाही के बाद अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिये सात फरवरी की तारीख तय की। तब तक विधायकों को ईसी के हलफनामे पर अपना अपना जवाब दाखिल करना होगा।

बहरहाल अदालत ने विधायकों के अयोग्य ठहराये जाने के कारण खाली हुए विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की घोषणा को लेकर किसी तरह की अधिसूचना जारी करने से चुनाव आयोग पर रोक लगाने वाली एकल न्यायाधीश के 24 जनवरी के अंतरिम आदेश की समय सीमा तब तक के लिये आगे बढ़ा दी।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति के आदेश के बाद विधानसभा की सदस्यता गंवाने वाले आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों में से कुल 8 पूर्व विधायकों ने हाई कोर्ट में ये याचिका लगाई है। आप विधायकों ने दावा किया कि उनके खिलाफ ऑफिस ऑफ प्रॉफिट यानि लाभ का पद का मामला बनता ही नहीं है। विधायकों ने अपनी याचिका में राष्ट्रपति की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके जरिए लाभ का पद धारण करने को लेकर उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया था।

इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सोमवार (29 जनवरी) को इस मामले को दो जजों की पीठ के समक्ष स्थानांतरित कर दिया। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक विधानसभा की इन 20 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा नहीं की जा सकेगी। जस्टिस विभू बाखरू ने ‘आप’ विधायकों की याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष भेज दिया ताकि दो जजों की नई पीठ गठित की जाए।

शिकायतकर्ता प्रशांत पटेल ने मामले की सुनवाई दो जजों की पीठ के समक्ष कराने की मांग की थी। पटेल के अधिवक्ता मुदीत मल्होत्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिका को गलत तरीके से एकल पीठ के समक्ष सूचिबद्ध कर दिया गया था। पटेल के इन दलीलों का निर्वाचन आयोग ने भी समर्थन किया। हालांकि ‘आप’ विधायकों ने पटेल और आयोग के इन दलीलों का विरोध किया।

20 विधायकों की सदस्यता रद्द

आपको बता दें कि दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। लाभ के पद मामले में पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 21 जनवरी को चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी। चुनाव आयोग ने 19 जनवरी को लाभ के पद मामले में इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की थी। ये सभी विधायक 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव पद पर थे, जिसे ‘लाभ का पद’ माना गया है।

हालांकि, इस फैसले से केजरीवाल सरकार पर खतरा नहीं हैं। विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया था कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है।अधिसूचना में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा व्यक्त की गई राय के आलोक में, मैं, रामनाथ कोविंद, भारत का राष्ट्रपति, अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उक्त 20 सदस्यों को दिल्ली विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराता हूं।

गौरतलब है कि 14 फरवरी 2018 को आम आदमी पार्टी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी के विधायकों की संख्या 66 से घटकर सीधे 46 पर आ गई है। अब 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने होंगे।

Rifat Jawaid on Office of Profit controversy

Posted by Janta Ka Reporter on Saturday, January 20, 2018

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, आम आदमी पार्टी ने 13 मार्च 2015 को अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था। इसको लाभ का पद बताते हुए एक वकील द्वारा राष्ट्रपति से शिकायत की गई थी। इसमें इनकी सदस्यता को रद्द करने की मांग की गई थी। 19 जून को वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया था।

जिसके बाद राष्ट्रपति ने शिकायत चुनाव आयोग भेज दी थी। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से मामले की जांच का निर्देश दिया था। चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को ‘लाभ का पद’ मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 रह गई थी।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था। इसके बाद से इन सभी 21 विधायकों की सदस्यता पर और सवाल खड़े हो गए थे। आप के विधायक 13 मार्च 2015 से 8 सितंबर 2016 तक संसदीय सचिव के पद पर थे।

 

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