नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने रविवार(12 फरवरी) को नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन से पूछा कि भारत में उनका क्या योगदान है। घोष ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हमारे एक बंगाली साथी ने नोबल पुरस्कार जीता और हमें इस पर गर्व है, लेकिन उन्होंने इस राज्य के लिए क्या किया? उन्होंने इस राष्ट्र को क्या दिया है?’घोष ने कहा कि ‘नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर के पद से हटाए जाने से सेन अत्यधिक पीड़ित हैं। ऐसे लोग बिना रीढ़ के होते हैं और इन्हें खरीदा या बेचा जा सकता है और ये किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं।’ घोष के बयान की चौतरफा निंदा हो रही है।
सेन के खिलाफ टिप्पणी करने पर घोष पर पलटवार करते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने भाजपा की राजनीतिक संस्कृति पर भी सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल भाजपा की सस्ती राजनीति की संस्कृति को दर्शाता है।
चटर्जी ने कहा कि ऐसे लोगों के लिए जिन्होंने हमारे देश को यह सम्मान दिलाया, उनके पास कोई इज्जत नहीं है और वे राष्ट्रवाद की बातें करते हैं।’ ‘यह राष्ट्रवाद के उनके ब्रांड का उदाहरण है, जहां असहमति के लिए कोई जगह नहीं है। यदि आप उनसे असहमत हैं तो वे आपको बदनाम करेंगे।’