उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप मामले और जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की नन्ही बच्ची से गैंगरेप और उसकी नृशंस हत्या सहित देश में बढ़ते महिला अपराधों को लेकर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने गुरुवार (19 अप्रैल) को अपने विचार जाहिर किए हैं। उन्होंने महिलाओं के प्रति सम्मान में कमी का ठीकरा भारत में रहे विदेशी शासन पर फोड़ा है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय परंपरा का पालन करते हुए महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
(File | PTI)समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक नायडू ने कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षान्त- समारोह को संबोधित करते उस स्थिति के लिए अतीत में विदेशी शासन को जिम्मेदार ठहराया जहां महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि महिलायें आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। भारतीय अपने देश को ‘भारत माता’ कहकर पुकारते है।
उन्होंने कहा कि गोदावरी, गंगा, यमुना जैसी ज्यादातर हमारी नदियों के नाम महिलाओं के नाम पर है। सरस्वती माता ज्ञान के लिए, दुर्गा माता रक्षा के लिए और लक्ष्मी माता धन के लिए है। औपनिवेशिक और विदेशी शासन को जिम्मेदार ठहराते हुए, उन्होंने इन परंपराओं के बावजूद उस तरीके की निंदा की जिसमें समाज ने अब महिलाओं को देखा है। नायडू ने कहा, ‘यह शर्मनाक है और इसकी निंदा किये जाने की जरूरत है।’
उन्होंने कठुआ बलात्कार और हत्या मामले या उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बलात्कार को लेकर हुए विवाद का जिक्र नहीं किया। उपराष्ट्रपति ने छात्रों से किसी भी मांग को पूरा करने के लिए हिंसा का सहारा नहीं लेने का आग्रह किया और कहा कि विवादों को बातचीत के जरिये सुलझाया जाना चाहिए। विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से होने चाहिए क्योंकि संपत्तियों को नष्ट करना हमारा अपना नुकसान है।
नायडू ने विश्वविद्यालय के स्नातकों से अपनी क्षमता और चरित्र के अनुसार अपना करियर बनाने का आग्रह किया और कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। उन्होंने छात्रों को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और ‘न्यू इंडिया’ बनाने के लिए अनुशासन अपनाने और कड़ी मेहनत करने के लिए कहा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सफलता की कहानियों का हवाला और अपने जीवन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत अवसरों की भूमि है।
नायडू ने कहा कि हर शख्स के पास अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से ऊंचाई तक पहुंचने का अवसर है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को अनुशासन को आत्मसात करना चाहिए, अन्य लोगों का सम्मान करना चाहिए और देश के हित में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भाषा संस्कृति का प्रतिबिंब है और देश के लोगों को अपनी मातृभाषा के लिए प्यार होना चाहिए, जो दिल से पैदा होता है।’
साथ ही उन्होंने छात्रों से सांस्कृतिक संवेदनशीलता विकसित करने और दूसरों के प्रति सम्मान के लिए देश के दूसरे हिस्से से कम से कम एक भाषा सीखने को कहा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि, ‘भारतीय आबादी का 65 प्रतिशत 30 वर्ष से कम आयु का है और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी समाज के सभी वर्गों के जीवन में जबर्दस्त बदलाव ला सकती है।’