बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता, लेखक, डायरेक्टर और नाटककार गिरीश कर्नाड का सोमवार (10 जून) को 81 साल की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि कर्नाड पिछले काफी समय से बीमार थे। उन्होंने बेंगलुरु में आखिरी सांस ली। बीते महीने ही 81 साल के हुए गिरीश कर्नाड का जन्म 1938 में हुआ था। पिछले महीने ही उन्होंने 81वां जन्मदिन मनाया था। उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे सम्मानित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका था। उन्होंने बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया था।

गिरीश कर्नाड ने सलमान खान की सुपरहिट फिल्म ‘एक था टाइगर’ और ‘टाइगर जिंदा है’ सहित कई बड़ी फिल्मों में काम किया था। कर्नाड को भारत के जाने-माने समकालीन लेखक, अभिनेता, फिल्म निर्देशक और नाटककार के तौर पर भी जाना जाता था। उनके निधन से बॉलीवुड में शोक का माहौल है। गिरीश की हिंदी के साथ-साथ कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा पर भी अच्छी खासी पकड़ थी।
Girish Karnad, veteran actor and playwright, and Jnanpith awardee, passed away this morning. More details awaited pic.twitter.com/YiQT8kCEqD
— ANI (@ANI) June 10, 2019
गिरीश को कन्नड़ फिल्म ‘संस्कार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके अलावा उनको 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1974 में पद्म श्री, 1992 में पद्म भूषण, 1972 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1992 में कन्नड़ साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार और 1998 में उन्हें कालिदास जैसे सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
उन्होंने अपना पहला नाटक कन्नड़ में लिखा था, जिसे बाद में अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया। उनके चर्चित नाटकों में ‘यताति’, ‘तुगलक’, ‘हयवदना’, ‘अंजु मल्लिगे’, ‘अग्निमतु माले’, ‘नागमंडल’ और ‘अग्नि और बरखा’ शामिल हैं। 1960 के दशक में कर्नाड के यायाति 1961, ऐतिहासिक तुगलक 1964 जैसे नाटकों को समालोचकों ने सराहा था, जबकि उनकी तीन महत्वपूर्ण कृतियां हयवदना 1971, नगा मंडला 1988 और तलेडेंगा 1990 ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की।