बता दें कि योगी सरकार बनने के बाद से उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला जातीय संघर्ष की आग में झुलस रहा हैं। कभी दलित और मुसलमानों के बीच झड़प तो कभी दलित और ठाकुरों के बीच संघर्ष जारी है। ताजा मामला दलित और सवर्ण वर्ग के बीच हुई हिंसा है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि सहारनपुर जल रहा है तो इसके पीछे पुलिस प्रशासन की नाकामी तो है ही, राजनीति भी गहरी है।
20 अप्रैल 2017, 5 मई 2017, 9 मई 2017 पिछले 20 दिनों में सहारनपुर में हिंसा की ये तीसरी बड़ी घटना है। सबसे पहले 20 अप्रैल को एक शोभायात्रा को लेकर दो गुट आपस में भिड़ गए थे। इसके बाद 5 मई को बड़गांव थाना के शब्बीरपुर गांव में डीजे बजाने को लेकर दो गुटों में जमकर पत्थरबाजी हुई थी। यहां फायरिंग में एक युवक की जान चली गई थी। जबकि 9 मई को एक बार फिर हिंसा भड़क गई।
दरअसल, 5 मई को शब्बीरपुर गांव में दलितों ने पहले जिस तरह से ठाकुरों के खिलाफ उकसावे की कार्रवाई की, उसके पीछे स्थानीय बीएसपी प्रधान का हाथ बताया जाता है। हालांकि, बीएसपी इन आरोपों को खारिज कर चुकी है। इस मामले को पुलिस गंभीरता से समझ नहीं पाई, लिहाजा ठाकुरों की तरफ से आगजनी की वारदात को वह रोक नहीं पाई। जिसके बाद 9 मई की हिंसा दलितों की तरफ से बदले की कार्रवाई थी।