केरल ‘लव जिहाद’ मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘हादिया बालिग हैं, NIA उनकी शादी की जांच नहीं कर सकती’

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केरल के बहुचर्चित कथित ‘लव जिहाद’ मामले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (23 जनवरी) को बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि हादिया की शादी की जांच नहीं हो सकती। जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा हादिया बालिग हैं। हादिया की शादी की जांच का काम राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का नहीं है।’ सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को करेगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हादिया बन चुकीं अखिला अशोकन हादिया होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी करने तमिलनाडु के सलेम गईं हैं। न्यायालय ने 25 वर्षीय हदिया को उसके माता-पिता की देख-रेख से अलग करके अपनी पढ़ाई पूरी करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह विवाह विवाद से परे है। हादिया बालिग है। इस पर न तो पक्षकारों को सवाल उठाने का हक है और न ही किसी कोर्ट या जांच एजेंसी को। इस तरह इस शादी की जांच NIA नहीं कर सकती। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन सदस्यीय बेंच कर रही है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हादिया अपनी मर्जी से शादी की बात कह रही है। ऐसे में कोर्ट इस शादी को कैसे अवैध ठहरा सकती है? कोर्ट ने कहा कि यदि हादिया को कोई समस्या नहीं है, तो फिर यह मसला ही खत्म है। जहां तक लड़के के क्रिमिनल बैकग्राउंड की बात है, तो उसकी जांच हो सकती है। लेकिन शादी की जांच का हक किसी को नहीं है।

पिछले साल 27 नवंबर को हादिया सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कोर्टरूप में पेश हुईं थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा था कि हादिया को उसके माता-पिता अपने कब्जे में न रखें। कोर्ट ने हादिया को सीधे तमिलनाडु के सेलम के होमियोपैथिक मेडिकल कालेज ले जाने और इंटर्नशिप पूरी कराने का आदेश दिया था।

हादिया ने सुप्रीम कोर्ट में साफ तौर पर कहा था कि मुझे अपनी आजादी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने हादिया से पूछा था, ‘क्या आप सरकारी खर्चे पर अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहेंगी?’ इस पर हादिया ने जवाब दिया था, ‘मैं पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं लेकिन सरकारी खर्चे पर नहीं। मेरे पति मेरा ख्याल रख सकते हैं।’

क्या है मामला?

बता दें कि अखिला अशोकन उर्फ हादिया ने कथित रूप से धर्म परिवर्तन कर शफीन जहां नाम के एक मुस्लिम शख्स से निकाह किया था। इस निकाह का विरोध करते हुए लड़की के पिता के. एम. अशोकन ने केरल हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर शादी रद्द करने की गुहार लगाई थी।

इस याचिका पर केरल हाई कोर्ट ने मुस्लिम युवक के हिंदू युवती के साथ विवाह को लव जिहाद का नमूना बताते हुए इसे अमान्य घोषित कर दिया था। शादी ‘रद्द’ किए जाने के केरल हाईकोर्ट के फैसले को शफीन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। युवक का दावा है कि महिला ने स्पष्ट किया है कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया है।

24 वर्षीय हदिया शफिन का जन्म केरल के हिंदू परिवार में हुआ था और उसका नाम अखिला अशोकन था। उसने कथित तौर पर परिवार की इजाजत के बिना मुस्लिम युवक से विवाह किया था। जबकि युवक का कहना है कि यह विवाह आपसी सहमति से हुई थी। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

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