सुप्रीम कोर्ट मंगलवार (16 अप्रैल) को मुस्लिम महिलाओं को नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में प्रवेश करने की अनुमति देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है। इसे लेकर शीर्ष अदालत ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को नोटिस भी जारी किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया कर पुणे की एक दंपति द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने के लिए कहा है।
न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने पुणे के एक दंपत्ति की याचिका पर केंद्र को जवाब देने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम दंपत्ति की याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी नोटिस जारी किए।
Supreme Court issues notice to the Centre, National Commission for Women, Central Waqf Council and All India Muslim Personal Law Board on a plea seeking direction that Muslim women be allowed to enter mosques and offer prayers. pic.twitter.com/8sVfy1EtMU
— ANI (@ANI) April 16, 2019
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध गैर-कानूनी और असंवैधानिक है, क्योंकि ऐसी प्रथा न केवल महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम धर्म ग्रंथ कुरान में पुरुष और महिला के बीच कोई भेद नहीं किया गया है। ऐसा भी कोई प्रमाण नहीं है कि पैगम्बर मोहम्मद ने महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश और नमाज अदा करने का विरोध किया था। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि वह केरल के सबरीमला मंदिर से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण इस मामले पर सुनवाई करेगी।
पीठ ने कहा, ‘‘केवल एक ही वजह है कि हम आपको सुन सकते हैं और वह सबरीमला मंदिर मामले में आपका फैसला है।’’ याचिकाकर्ता दंपती ने इससे पहले कई मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश के लिए अपील की थी, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता का कहना है कि महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश से रोकना गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक है और यह मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन करता है।