हिन्दुत्व ही होगा उप्र उपचुनाव में बीजेपी का मुद्दा

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बीजेपी की चुनावी कलई की गांठे खुलने लगी है। अब बीजेपी की कमान में कोई तीर बाकी नहीं रहा जिसे वो विकास के नाम पर चला सके। उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में उपचुनाव होने वाला है। जिनमें मुज्जफरनगर, देवबंद, फैजाबाद शहरों के नाम है।

बीजेपी किसी भी कीमत पर ये चुनाव हारना नहीं चाहती है। बीजेपी शासन अंर्तग्त मोदी सरकार के पिछले 2 वर्षों में लोगों ने विकास के वादों की धुधंली पड़ती छवि को देखा हैं।

भारतीय जनमानस ने दिल्ली और बिहार में बीजेपी को जिस तरह से करारी शिकस्त दी है उससे ये साफ हो गया है कि मोदी ब्रांड का जादू अब टूट चुका है। बीजेपी की छवि एक साम्प्रदायिक पार्टी के रूप में अधिक जानी जाती है। जबकि बीजेपी के नेताओं का कहना है कि वो विकास को प्रमुखता देते है।

बीजेपी की कमान के प्रमुख तीरों में गाय, लव जेहाद, घर वापसी, साम्प्रदायिक दंगें, राम मंदिर जैसे मुद्दे होते है जिन्हें वो आखिरी समय में लाते है। बिहार चुनाव प्रचार के आखिर चरण में विकास की फीकी पड़ती चमक के बदले बीजेपी गाय को निकाल कर ले आई थी जबकि बिहार के लोगों ने इसको पूरी तरह से नाकार दिया था। अब जबकि उत्तर प्रदेश में तीन जिलों में 13 फरवरी को चुनाव होने जा रहे है तो बीजेपी अपनी पुरानी धुरी पर लौट आने को विवश है।

मुज्जफरनगर में खुद स्मृति ईरानी चुनावी कमान सम्भालने के लिये मैदान में उतर रही है। जबकि अन्य फायर ब्रांड चेहरे जिनमें संगीत सोम, हुकम सिंह, सुरेश राणा, संजीव बलियान हिन्दुत्व का झंडा उठाकर माहौल को गर्मा रहे होगें। ये सभी चेहरे मुज्जफरनगर दंगों के प्रमुख आरोपियों में से है। इसलिये मोदी सरकार को लगता है कि वो अपनी पुरानी चाल में आकर ही लोगों को आर्कषित कर सकती है।

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