मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनकी सरकार द्वारा आदिवासियों के लिए किए जा रहे कार्यों का मंगलवार को ब्योरा जारी किया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आते ही उनकी सरकार ने आदिवासियों के पक्ष में उनके कल्याण के लिए कई सारे कदम उठाए हैं। कमलनाथ ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को यहां आदिवासियों के एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को आदिवासियों के पक्ष में विरोध का नेतृत्व करते हुए मौजूदा सीएम कमलनाथ से मुलाकात की। उन्होंने कमलनाथ सरकार को आदिवासी समुदाय की मांगों का एक ज्ञापन सौंपा और उनकी सभी मांगों को मान लिया गया। इसके बाद शिवराज सिंह ने ट्वीट कर सीएम कमलनाथ की तारीफ की है।
शिवराज सिंह ने ट्वीट कर लिखा, ‘मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने आदिवासी भाइयों की मांगों को माना है। मैंने आदिवासी भाइयों से बात की है, सभी संतुष्ट हैं। आदिवासी भाइयों-बहनों को इस आंदोलन की सफलता के लिए बधाई देता हूं। इस सफलता का विजय जुलूस के स्वरूप में उन्होंने उत्सव मनाया।’
मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने आदिवासी भाइयों की मांगों को माना है। मैंने आदिवासी भाइयों से बात की है, सभी संतुष्ट हैं। आदिवासी भाइयों-बहनों को इस आंदोलन की सफलता के लिए बधाई देता हूं। इस सफलता का विजय जुलूस के स्वरूप में उन्होंने उत्सव मनाया। pic.twitter.com/2FSPbdH1uR
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) June 18, 2019
वहीं शिवराज सिंह के कार्यालय की ओर से किए गए एक अन्य ट्वीट में उन्होंने आंदोलनरत बुधनी के आदिवासियों की मांगें मानने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया है। इस सफलता पर शिवराज सिंह ने आदिवासियों के साथ मिलकर विजय जुलूस भी निकाला।
श्री @ChouhanShivraj ने आंदोलनरत बुधनी के आदिवासियों की मांगें मानने पर मुख्यमंत्री श्री @OfficeOfKNath के प्रति आभार व्यक्त किया। pic.twitter.com/hH1lYWQ8rM
— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) June 18, 2019
सरकार की तरफ से जारी एक बयान में सीएम कमलनाथ ने कहा, ‘हमारी सदैव नीति रही है कि आदिवासी वर्ग का न केवल सर्वांगीण विकास हो, बल्कि परम्परा से उन्हें मिले अधिकारों का संरक्षण भी हो। वनाधिकार कानून 2006 यूपीए सरकार ने लागू किया था। इस कानून के अंतर्गत मध्य प्रदेश में 6 लाख 25 हजार आवेदन पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहन की सरकार के दौरान आए थे। इनमें से तीन लाख 55 हजार आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। हमारी सरकार ने इन सभी आवेदनों का पुनरीक्षण कर पात्र कब्जाधारियों को वनाधिकार पत्र देने का काम शुरू किया है।’
मुख्यमंत्री ने आदिवासियों और वनवासियों के लिए किए जा रहे कार्यों का जिक्र करते हुए कहा, ‘राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 2000 रुपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी है। सरकार के इस निर्णय से तेंदूपत्ता संग्रहण के कार्य में लगे आदिवासियों को प्रति बोरा 500 रुपये का लाभ मिला है। यह राशि पूर्व में बैंकों के माध्यम से तेंदूपत्ता श्रमिकों को दी जाती थी, जिससे उन्हें कठिनाई होती थी। हमारी सरकार ने यह निर्णय लिया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की राशि का नगद भुगतान संग्राहक को किया जाएगा।’ (इनपुट- आईएएनएस के साथ)