NDTV इंडिया के सरकारी प्रतिबंध पर पत्रकार रवीश कुमार की फोन पर ‘दो टूक बातचीत’

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पत्रकार रवीश कुमार एक आॅडियो आया है, जो तेजी के साथ वायरल हुआ जिसमें वो एनडीटीवी के प्रतिबंध पर बातचीत कर रहे है।

इसमेे एक पत्रकार से बात करते हुए वो कहते है कि ‘मैं चाहता भी हूं कि महाराष्ट्र के जो सजग दर्शक है वो इस बात को नोट में ले कि ये दो तरह से हो रहा है। एक नोटिस भेजकर दबाने की कोशिश कि जा रही है। दूसरा नसीहत दी जा रही हैं।

नसीहत ये दी जा रही कि आप राजनीति ना करें, आप सवाल ना करें और आप अथोरिटी को कोई सवाल ना करें? जबकि संविधान की बुनियादी समझ यहीं कहती हैं कि अथोरिटी वहीं होती है, जिसकी एकाउंटीबिलीटी होती है। इसीलिए अथोरिटी से सवाल करना पत्रकार का बुनियादी काम है।’

आगे बात करते हुए वो कहते है कि ‘और ये सलाह मंत्री से लेकर संत्री तक को दिनभर घूम-घूम कर दे रहे है। लोगों को समझना चाहिए कि हमारा क्या होगा। दो-चार पत्रकार जिन्हें हिन्दुस्तान इस बात के लिए जानता है कि वो दुनिया का सबसे बड़ा और महान लोकतंत्र है।
वो अगर अलग बात करने वाले पत्रकारों को जिनकी संख्या वैसे भी मुल्क में दस या पच्चीस रह गई है, उनकी आवाज़ अगर बर्दाश्त नहीं कर सकता तो इस मुल्क के लोग ऐसी पत्रकारिता को सर्पोट नहीं कर सकते, तो वो क्या करेगें? वो अपने हाथों से इस लोकतंत्र का गला घोंट देेगें। जो हो रहा है उनके साथ इससे सर्तक रहने की जरूरत है।’
इसके बाद रवीश कहते है कि ‘जब पत्रकारिता का आप गला घोंटते है तो किसी संपादक की नौकरी नहीं जाती बल्कि लाखों लोगों की आवाज को आप दबा देते हो।
लाखों लोगों की जिन्दगी के बदले आप किसी कारपोरेट से सौदा करते हैं। इसिलिए ये बहुत जरूरी है कि जब भी पत्रकारिता पर सवाल हो, सवाल हो, सवाल होना चाहिए।

लेकिन नोटिस के जरीये धमकाने का सवाल और आॅफ एयर करने की प्रक्रिया है उसका इरादा बस इतना है कि अगर आप सवाल पुछने वालों को दबा सकते है तो आप आम अवाम का सोच लिजिए कि आपका क्या हश्र करने जा रहे है, आपकी क्या हालत करने जा रहे है। आए दिन, एंकरों को, आप अपने पत्रकार मित्रों को सुनते रहे होगें हमसे भी जो जुनियर है वो फोन पर कहते है सर ये बात फोन पर मत करों कोई टेप कर रहा होगा। आप मैसेज लिख कर मत दो कोई देख लेगा, कोई सरकार देख लेगी।’

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