गौ रक्षकों के समर्थन में आए रामदेव, कहा- ‘तस्करों पर पुलिस की सख्ती नहीं होने से उन्हें सड़कों पर आना पड़ता है’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भी देश में कथित गौ गोरक्षकों के भेष में हिंदुत्व आतंकियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। गौरक्षा के नाम पर हिंसा किए जाने की घटनाओं पर लगाम लगाने संबंधी याचिकाओं पर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। पिछले दिनों सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा था कि कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। चाहे कानून हो या नहीं, कोई भी समूह कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता है।

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इस बीच गौरक्षकों द्वारा की जाने वाली घटनाओं का अप्रत्यक्ष रूप से योग गुरु बाबा रामदेव ने समर्थन किया है। रामदेव ने कहा है कि गौ तस्करों को रोकने के लिए किसी न किसी तो आगे आना था। जब पुलिस और प्रशासन ऐसा कर पाने में असफल रही तभी गौ रक्षकों को सड़कों पर उतरना पड़ता है। हालांकि बाबा रामदेव ने गायों को अवैध रूप से कटवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा के मुताबिक, रामदेव ने रविवार को जयपुर में कहा है कि गो तस्करी रोकने में पुलिस और प्रशासन को जितनी सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, वह नहीं होने के कारण गोरक्षकों को सड़कों पर आना पड़ता है। एक कार्यक्रम में भाग लेने आए रामदेव ने संवाददाताओं से कहा, ‘अवैध तरीके से जो लोग गायों को कत्लखानों में कटवाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।’

योग गुरू ने कहा कि कुछ गोरक्षक ज्यादती कर देते हैं जिनके चलते 90 प्रतिशत गोरक्षकों की छवि धूमिल होती है। उन्‍होंने कहा कि गोहत्यारों के खिलाफ कोई नहीं बोलता है। गोहत्यारों को प्रोत्साहन क्यों मिलता है, यह कतई नहीं होना चाहिए। यदि किसी ने कत्लखाने का लाइसेंस भी ले रखा है और गायों को ले जा रहा है तो हम इसके पक्षधर नहीं है।

पूर्ण गोहत्या रोकने की पैरवी करते हुए बाबा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा राष्ट्रभक्त और गोभक्त देश में और कौन होगा। उन्हें केंद्र में पूर्ण गोहत्या रोकने का कानून बनाना चाहिए। हालांकि रामदेव ने कहा कि चार सालों में केंद्र ने अभी तक कानून नहीं बनाया है और हम ऐसा कानून बनने की उम्मीद लगाए बैठै हैं।

उन्होंने देश में घुसपैठियों के एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि एक भी आदमी अवैध तरीके से भारत में नहीं रहना चाहिए, फिर चाहे वह बांग्लादेश, पाकिस्तान या अमेरिका का क्यों न हो। भारत में करीब तीन से चार करोड़ लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। ऐसे लोग कितनी बड़ी हानि देश की अंखडता, एकता और सम्प्रभुता के लिए कर सकते हैं जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।

 

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