एलोपैथिक दवाओं और डॉक्टरों पर अपने विवादित बयानों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बने पतंजलि आयुर्वेद कंपनी के संस्थापक और योग गुरू बाबा रामदेव ने अब बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार का वह वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे केमिकल इंजेक्शन के इस्तेमाल से कहीं बेहतर आयुर्वेद को बताते नजर आ रहे हैं और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के फायदे गिना रहे हैं।
दरअसल, रामदेव ने सोमवार (31 मई) को अपनी बात के समर्थन में अभिनेता के दो वीडियो शेयर किए हैं। इसमें अक्षय कुमार ने आयुर्वेद का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति में शरीर का कोई ऐसा मर्ज नहीं है जिसका इलाज न हो।
वीडियो शेयर करते हुए अक्षय के हवाले से उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “आप अपनी बॉडी के खुद ब्रांड अम्बेसडर बने, सिंपल और हेल्दी लाइफ जीयें, और दुनिया को दिखा देते हैं, कि हमारे हिंदुस्तानी योग व आयुर्वेद में जो ताकत है, वह किसी अंग्रेज के केमिकल इंजेक्शन में नहीं है- अक्षय कुमार।”
— स्वामी रामदेव (@yogrishiramdev) May 31, 2021
रामदेव द्वारा शेयर किए गए वीडियो में अक्षय कुमार ने कहा कि शरीर में कोई ऐसी बीमारी नहीं जिसका इलाज हमारी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति में न हो। देश में आयुष मंत्रालय है जो उपचार की वैकल्पिक व्यवस्था को बढ़ावा देता है। सालों पुराने हमारे ये इलाज के तरीके न केवल नेचुलर, बल्कि साइंटिक भी हैं। हर इलाज के पीछे पक्का लॉजिक है। लेकिन, दिया तले अंधेरा है। बेस्ट इलाज देश में है, लेकिन हम उसे तलाशने बाहर जाते हैं।
अक्षय ने बताया कि हाल में उन्होंने एक आयुर्वेदिक आश्रम में कुछ दिन बिताए। इस आश्रम में वह अकेले हिंदुस्तानी थे। बाकी सभी विदेशी थे। जब विदेशी हमारे देश में ठीक हो सकते हैं तो भला हम क्यों नहीं? उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि वे यह नहीं सोचें कि ये बातें वह किसी आयुवेर्दिक सेंटर का ब्रांड एंबेसडर बनकर कह रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं ये चीजें अपनी खुद की बॉडी का ब्रांड एंबेसडर बनकर कह रहा हूं।’
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भी अपनी बॉडी ब्रांड एंबेसडर बनें। सिंपल और हेल्दी लाइफ जीएं। दुनिया को दिखाएं कि हमारे हिंदुस्तानी योग व आयुर्वेद में जो ताकत है वह कहीं नहीं है। अक्षय कुमार ने कहा कि हम भारतीय कब अपनी चीजों की कीमत समझेंगे। विदेशी यहां आकर इलाज करा रहे हैं। हम उनके पीछे भाग रहे हैं। ‘मुझे एलोपैथिक इलाज और दवाओं से कोई प्रॉब्लम नहीं है। वे अपनी जगह बहुत अच्छी हैं। लेकिन, हम इलाज के अपने ट्रेडिशनल तरीकों को क्यों भूले हैं।’