राजस्थान में नवगठित अशोक गहलोत सरकार ने राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक आदेश को पलटने जा रहीं है। राजस्थान सरकार के लेटर पैड और किसी भी लिखित आदेश पर अब जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय का फोटो वाला लोगो नहीं दिखेगा। कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में अब लेटर पैड और सरकारी परिपत्रों पर केवल अशोक स्तंभ ही छापा जाएगा। इसको लेकर जल्द ही आदेश जारी हो सकते हैं।

बता दें कि पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने 11 दिसंबर 2017 को एक आदेश जारी कर सभी सरकारी लेटर पैड और परिपत्रों पर दीनदयाल उपाध्याय का फोटोयुक्त लोगो छापना अनिवार्य किया था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही यह आदेश अब निरस्त किया जा रहा है।
बीजेपी के शासन में सरकार ने आदेश जारी कर सभी आदेशों पर पं. दीनदयाल उपाध्याय का लोगो लगाना अनिवार्य किया था। जिसके बाद कांग्रेस सरकार ने इसका विरोध भी किया था। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि बीजेपी की सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडें को लागू करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि यह अशोक स्तम्भ का अपमान है जो कि अलोकतांत्रिक है।
जी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सरकारी पुस्तकालयों में पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर लिखित पुस्तकें रखनें की बाध्यता भी हटाने जा रही है। गौरतलब है कि बीजेपी की पिछली सरकार में दीनदयाल उपाध्याय संपूर्ण वांगमय की पुस्तकें सचिवालय सहित प्रदेशभर की लाइब्रेरी में रखवाई गईं थी।