महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, गुजरात, छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से बुरा हाल है। इस बीच, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास को पत्र लिखकर केरल में बाढ़ के चलते किसानों के लिए कृषि कर्ज वसूली पर लगी रोक बढाकर 31 दिसंबर करने का अनुरोध किया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केरल में आठ अगस्त के बाद बाढ़ में 95 लोगों की मौत हो चुकी है और बेघर हुए 1.89 लाख लोगों ने 1118 राहत शिविरों में शरण ले रखी है। वायनाड के सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को इनमें से कुछ शिविरों का दौरा किया था। आरबीआई गवर्नर को एक पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि केरल पिछली एक सदी से भी ज्यादा समय में आयी सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है और इस आपदा के कारण व्यापक स्तर पर फसलों और अन्य संपत्ति को हुए नुकसान के कारण किसान कृषि कर्ज का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जिंस कीमतों में तेज गिरावट जैसे बाह्य कारणों ने भी किसानों के कर्ज की अदायगी की क्षमता पर बुरा असर डाला है। कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘एसएआरएफएईएसआई (वित्तीय संपत्तियों का प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन) कानून के तहत बेबस किसानों के खिलाफ बैंकों द्वारा भुगतान वसूली कार्रवाई आरंभ करने से केरल में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘राज्य सरकार और विपक्षी दलों द्वारा कर्ज अदायगी भुगतान पर रोक की मियाद 31 दिसंबर 2019 तक करने की मांग के बावजूद राज्य स्तरीय बैंकरों की कमेटी ने मांग को ठुकरा दिया।’’ दास को लिखे पत्र में राहुल ने कहा, ‘‘मैं आरबीआई से भुगतान पर रोक को 31 दिसंबर 2019 तक करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध करता हूं ।’’
Rahul Gandhi in a letter to the Governor of Reserve Bank of India, Shaktikanta Das: Almost a year back, Kerala witnessed the worst floods in over a century. I request RBI to take measures to extend the moratorium on repayment of loans by farmers to December 2019. pic.twitter.com/dKxiRzfnFH
— ANI (@ANI) August 14, 2019
कांग्रेस नेता ने सोमवार को केरल में अपने वायनाड लोकसभा क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया था और बाढ़ से प्रभावित होने वालों को अपना जीवन फिर से संवारने के लिए हर मुमकिन मदद का आश्वासन दिया था। इस दौरान वह बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित पुथुमाला भी गए थे।