सीबीआई में छिड़े घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (25 अक्टूबर) को कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से कराने की मांग करने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने पर वह विचार करेगा। आपको बता दें कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारियों में जांच ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना भी शामिल हैं जिन्हें उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज़ के वकील प्रशांत भूषण के इस कथन पर विचार किया कि भ्रष्टाचार के व्यापक मुद्दे जांच एजेंसी को प्रभावित कर रहे हैं और इसलिए जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है। पीठ ने भ्रूषण को इस मामले में सारा विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए कहा कि इस याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए विचार किया जाएगा।
Supreme Court agrees to hear a fresh petition filed by advocate Prashant Bhushan seeking SIT probe against CBI officials, including #RakeshAsthana pic.twitter.com/2MvHEo6QTi
— ANI (@ANI) October 25, 2018
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गैर सरकारी संगठन ने अस्थाना सहित जांच ब्यूरो के कई अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से कराने का अनुरोध किया है। अस्थाना को जांच ब्यूरो के मुखिया आलोक कुमार वर्मा के साथ सभी अधिकारों से वंचित करके अवकाश पर भेज दिया गया है। जांच ब्यूरो के निदेशक और अस्थाना के बची छिड़ी अप्रत्याशित जंग बुधवार को शीर्ष अदालत में पहुंच गई थी। शीर्ष अदालत इस मामले में आलोक कुमार वर्मा की याचिका पर 26 अक्टूबर को सुनवाई के लिए तैयार हो गया था।
आलोक कुमार वर्मा ने, खुद को जांच एजेंसी के मुखिया के अधिकारों से मुक्त करने और अवकाश पर भेजने के सरकार के निर्णय को चुनौती दी है। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा के 1986 बैच के अधिकारी और जांच ब्यूरो में संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सारी जिम्मेदारी सौंपने के निर्णय को भी चुनौती दी है। वर्मा और अस्थाना के बीच चल रहे गतिरोध की परिणति हाल ही में अस्थाना और ब्यूरो में पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के रूप में हुई। देवेंद्र कुमार इस समय जांच ब्यूरो की हिरासत में हैं।
यह प्राथमिकी 15 अक्टूबर को सतीश बाबू सना की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले की जांच करने वाले अधिकारी देवेंद्र कुमार बार-बार उसे जांच ब्यूरो के कार्यालय में बुलाकर परेशान कर रहे थे और क्लीन चिट देने के लिए पांच करोड़ रूपए की रिश्वत मांग रहे थे। अस्थाना और कुमार दोनों ने ही इस प्राथमिकी को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देते हुये इसे निरस्त करने का अनुरोध किया है।
हाई कोर्ट ने मंगलवार को अस्थाना के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बाद ही मंगलवार की रात में केंद्र, केंद्रीय सतर्कता आयोग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और जांच ब्यूरो के निदेशक और विशेष निदेशक दोनों को ही उनके समस्त अधिकारों से मुक्त करने के साथ ही अवकाश पर भेजने का फैसला लिया।