गुजरात राज्यसभा चुनाव मे ‘नोटा’ के इस्तेमाल पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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गुजरात राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल पर गुरुवार(2 अगस्त) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिका दायर करने वाले कांग्रेस नेता से पूछा है कि 2014 की अधिसूचना पर इतने दिन बाद आपत्ति क्यों? शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद गुजरात मे आठ अगस्त को नोटा विकल्प के साथ ही चुनाव होगा। 

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानिवलकर की पीठ हालांकि इस चुनाव में नोटा का विकल्प प्रदान करने की निर्वाचन आयोग की एक अगस्त की अधिसूचना की संवैधानिक वैधता पर विचार के लिये सहमत हो गयी। याचिकाकर्ता गुजरात कांग्रेस के मुख्य सचेतक शैलेश मनुभाई परमार की ओर से जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और हरीन रावल ने निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अमल पर अंतिरम रोक लगाने का अनुरोध किया तो पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाये। हम इसकी विवेचना करेंगे। हम कार्यवाही पर रोक नहीं लगा रहे हैं।’’

शीर्ष अदालत के एक फैसले के बाद से निर्वाचन आयोग चुनावों में नोटा का प्रावधान मतदाताओं को उपलब्ध करा रहा है। न्यायालय ने आयोग से कहा था कि चुनाव में नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने पर विचार किया जाये। न्यायालय सिब्बल की इस दलील से सहमत नहीं था कि नोटा का प्रावधान भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा। इस समय गुजरात में राज्यसभा से तीन स्थान रिक्त हैं और चुनाव मैदान में कांग्रेस के कद्दावर नेता अहमद पटेल सहित चार प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

नोटा के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका में विधानसभा सचिव द्वारा एक अगस्त को जारी परिपत्र निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।इस परिपत्र में कहा गया है कि राज्य सभा के चुनाव में नोटा का प्रावधान भी उपलब्ध रहेगा। कांग्रेस के मुख्य सचेतक शैलेष मनुभाई परमार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि चुनाव आयोग का राज्यसभा चुनावों में नोटा का विकल्प देना संविधान के अनुच्छेद 80(4) (राज्यसभा चुनावों से संबंधित), जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 और चुनाव संचालन नियम, 1961 के विरुद्ध है।

याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग का फैसला दुर्भावनापूर्ण है। परमार ने कहा कि इस मामले में आयोग सत्तारूढ़ दल के हाथों का औजार बन गया है। इस तरह वह संविधान तथा चुनाव नियमों के उल्लंघन की सुविधा दे रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों को आयोग सरकारी आदेश से बाईपास नहीं कर सकता।

कांग्रेस नेता द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि 2013 में नोटा लागू करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला आम चुनावों के लिए था। उसे राज्यसभा चुनावों में नहीं लागू किया जा सकता। गुजरात में राज्यसभा चुनाव में नोटा पर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था तीन साल से लागू है।

आयोग ने कहा कि साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आयोग ने जनवरी 2014 में ही राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में नोटा का विकल्प मुहैया करा दिया था। राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प को लेकर उत्पन्न भ्रम को दूर करते हुए आयोग ने 24 जनवरी 2014 को एक बार फिर राज्यों के मुख्य निवार्चन अधिकारियों को इस आशय का फैसला लागू करने के लिए कहा।

बीजेपी ने किया समर्थन

कांग्रेस के बाद बीजेपी ने भी चुनाव आयोग का रुखकर गुजरात में आगामी राज्य सभा चुनाव में ‘नोटा’ का विकल्प हटाने की मांग की है। बुधवार का बीजेपी ने चुनाव आयोग को सौंपे एक ज्ञापन में कहा है, यह कहा गया कि आगामी चुनाव में नोटा का इस्तेमाल राजनीतिक पार्टियों के बीच चर्चा का एक मुद्दा बन गया है और इसलिए, राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से पहले एक उपयुक्त आम राय बनाई जानी चाहिए।

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