अयोध्या विवाद: निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गैर-विवादित जमीन लौटाने की मोदी सरकार की मांग का किया विरोध

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अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में मंगलवार को एक नया मोड़ आ गया है। निर्मोही अखाड़े ने मंगलवार (9 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर केंद्र सरकार की उस याचिका का विरोध किया जिसमें विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थान के आसपास 67.390 एकड़ ‘अविवादित’ अधिग्रहित भूमि को मूल मालिकों को लौटाने की अपील की गई है।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में फैसला दिया था कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन बराबर हिस्सों में बांटी जाएगी और उसे निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड और राम लल्ला को दिया जाएगा।

निर्मोही अखाड़े ने अपनी नई अर्जी में केंद्र सरकार की याचिका का विरोध किया है जिसमें उसने उच्चतम न्यायालय के 2003 के फैसले में संशोधन की अपील की है। 2003 के फैसले में अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के आसपास 67.390 एकड़ ‘अविवादित’ अधिग्रहित जमीन मूल मालिकों को लौटने की अनुमति दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र ने राम जन्मभूमि न्यास को अधिग्रहित भूमि लौटने का प्रस्ताव दिया है और अधिग्रहित जमीन पर कई मंदिर हैं। अगर जमीन किसी एक पक्ष को दी गई तो इससे उनके अधिकार प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस भूमि विवाद का मैत्रीपूर्ण हल निकालने के लिए मध्यस्थतों को नियुक्त किया था।

बता दें कि 29 जनवरी को मोदी सरकार ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहित की गई 67 एकड़ जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिए कोर्ट पहुंची थी। मोदी सरकार ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए मांग की थी कि विवादित जमीन के अलावा बाकी जमीन लौटाई जाए।

सरकार ने याचिका में कहा था कि विवाद 0.313 एकड़ जमीन पर है, इसलिए विवादित जमीन को छोड़कर बाकी जमीन को लौटाया जाए और इसपर जारी यथास्थिति हटाई जाए। सरकार ने अपनी अर्जी में 67 एकड़ जमीन में से कुछ हिस्सा सौंपने की अर्जी दी है।

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