पाकिस्तान ने किया सुषमा स्वराज के भाषण का पलटवार, कहा- ‘भारत आतंकवाद की मां है’

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पाकिस्तान ने भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संयुक्त राष्ट्र महासभा में शनिवार को दिए भाषण के जवाब दिया है कि भारत ‘आतंकवाद की मां’ बताया है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान की स्थाई राजदूत डाक्टर मलीहा लोधी ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को निर्यात करने के भारतीय आरोपों का खंडन करते हुए भारत को दक्षिणी एशिया में आतंकवाद की मां और अभिभावक बताया है।

आतंकवाद को मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा करार देते हुए भारत ने शनिवार(23 सितंबर) को कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आतंकवादियों को प्रतिबंधित सूची में डालने पर सहमत नहीं हो सकती तो फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद की समस्या का कैसे मुकाबला करेगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जिन समस्याओं का समाधान तलाश रहा है उनमें आतंकवाद सबसे ऊपर है।

सुषमा ने पाक के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के भारत पर लगाए गए सभी आरोपों का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया, लेकिन आतंकवाद पर उनकी सबसे ज्यादा बखिया उधेड़ी। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत तो गरीबी से लड़ रहा है, लेकिन पड़ोसी हमसे लड़ रहा है। जो हैवानियत की हदें पार कर लोगों को मार रहा है, वह हमें इंसानियत और मानवाधिकार का सबक सिखा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा को संबोधित करते हुए डाक्टर मलीहा लोधी ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र सबसे बड़ा झूठ बोलने वाला है। मलीहा लोधी ने कहा कि भारत, पाकिस्तान के विरुद्ध आरोप लगाने पर उतर आया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ समस्त मामलों का समाधान वार्ता से चाहता है क्योंकि वार्ता के लिए पाकिस्तान के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संयुक्त राष्ट्र महासभा के भाषण का जवाब देते हुए मलीहा ने आरोप लगाया कि सुषमा ने अपने व्यंग्यात्मक संबोधन में कश्मीर के मुख्य मुद्दे को नजरअंदाज किया है।” मलीहा ने कहा कि अगर संबंधित पक्ष विवाद का समाधान करने में विफल होते हैं तो संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास न सिर्फ इसका अधिकार है, बल्कि उसकी प्रतिबद्धता है कि वह दखल दे और विवाद के समाधान में मदद करे।

उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की तारीख खत्म नहीं होती है। नैतिकता के बिकने की कोई अंतिम तारीख नहीं होती। भारत सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता।”

आतंकवाद के संदर्भ में सुषमा की टिप्पणियों और इसे परिभाषित करने पर जोर दिए जाने का हवाला देते हुए मलीहा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को आतंकवाद को परिभाषित करना चाहिए।

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