मोदी सरकार के साढ़े तीन साल पूरे हो चुके हैं। देश की जनता अब उनके वादों की जांच-पड़ताल कर रही है। सबसे ज्यादा बात जिस वादे की हो रही है वह है नौकरी और रोजगार। 2014 के आम चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने देश में हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन आज जमीनी सच्चाई इससे दूर नजर आती है। इस बीच केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को नौकरी देने के वादे से ही मुकर गए हैं।
Photo: APजी हां, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और देश के वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा है कि मोदीजी ने नौकरी देने का वादा किया ही नहीं था, उन्होंने तो रोजगार देने की बात कही थी। शुक्ला ने देश में बढ़ती महंगाई और गिरती विकास दर को दुनिया भर की समस्या बताया। बता दें कि इससे पहले भारतीयों के बैंक खातों में 15-15 लाख रुपये जमा करने के पीएम मोदी के वादे को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एक चुनावी जुमला करार दे चुके हैं।
अमित शाह ने कहा था कि नरेंद्र मोदी के काला धन वापस लाने के बाद हर परिवार के खाते में 15-15 लाख रूपए जमा करने की बात बस एक जुमला है। एबीपी न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि ये चुनावी भाषण में वजन डालने के लिए बोली गई बात है, क्योंकि किसी के अकाउंट में 15 लाख रुपए कभी नहीं जाते, ये बात जनता को भी मालूम है।
वहीं, सोमवार (15 जनवरी) को ‘सहयाद्री’ में ‘नवभारत टाइम्स’ से बात करते हुए वित्त राज्यमंत्री शुक्ला ने कहा कि, ‘मोदी जी लोकसभा चुनाव से पहले अपनी सभाओं में कहते थे कि हम हर साल एक करोड़ लोगों को रोजगार देंगे। उन्होंने नौकरी देने की बात कभी नहीं कही थी। नौकरी का मतलब सरकारी नौकरी नहीं होना चाहिए, बल्कि रोजगार होना चाहिए।’
उन्होंने बताया कि, ‘मुझे इस बात का फख्र है, और इसे देश भी मानता है कि मोदीजी की मुद्रा योजना से ही लगभग 10 करोड़ से अधिक लोगों को कर्ज देकर रोजगार शुरू करने का काम किया गया है। स्टार्टअप योजना से देश को फायदा हो रहा है। हमारी सरकार ने पांच लाख से एक करोड़ रुपये तक के कर्ज बिना किसी गारंटी के दिए। गांवों में महिलाओं के छोटे-छोटे समूह स्थापित बनाकर उन्हें शिशु कर्ज दिलाया। अब वे प्रतिदिन 500 से 600 रुपये कमा रही हैं।’
मोदी सरकार ने यू-टर्न मारने का बनाया रिकॉर्ड?
बता दें कि 15-15 लाख या युवाओं को हर साल 2 करोड़ नौकरी देने के अलावा सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार उन तमाम नीतिगत मामलों पर लगातार यू-टर्न मार रही है, जिसके विरोध में कभी बीजेपी नेताओं ने जमीन आसमान एक कर दिया था। 2014 के चुनावों में बीजेपी द्वारा वादा किया गया था कि दो करोड़ रोजगार हर साल पैदा करेंगे। मगर केंद्रीय श्रम मंत्रालय का कोई भी आंकड़ा 10 लाख भी नहीं पहुंचता दिखता है।
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने ऐसा एक दिन भी नहीं छोड़ा जब उन्होंने जीएसटी का विरोध ना किया हो। आज प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी उसी जीएसटी का गुणगान करते नहीं थकते। इसके अलावा आधार पर भी सरकार की यही स्थिति है। वहीं, प्रधानमंत्री बनने से पहले चुनाव में वादा किया कि किसानों को उनकी लागत का 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर कीमत दी जाएगी। लेकिन आज किसानों को उसकी लागत के बराबर भी मोल नहीं मिल पा रहा है।
विदेशी निवेश के खिलाफ विपक्ष में रहते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने सडकों पर लेट कर प्रदर्शन किया था। आज के वित्त मंत्री अरुण जेटली विपक्ष में रहते हुए एफडीआई के खिलाफ बोलते हुए यहां तक कह गए थे कि वह अपनी आखिरी सांस तक एफडीआई का विरोध करेंगे। और वही मोदी सरकार ने सबसे बड़ा यू-टर्न मारते हुए 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी है। यही वजह है कि लोग अब मोदी सरकार को यू-टर्न सरकार के नाम से संबोधित कर रहे हैं।