उर्दू के ताज मलिकजादा मंजूर नहीं रहे

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मशहूर-ओ-मारुफ शायर, समालोचक और उपन्यासकार मलिकजादा मंजूर अहमद का आज लखनऊ के जगरानी अस्पताल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। देश-विदेश में अपनी बेजोड ‘निजामत’ के लिए मशहूर श्री अहमद कुछ दिनों से बीमार चल थे।
छह बेटियों और दो बेटों के पिता का जन्म अम्बेडकरनगर के किछौछा में हुआ था। उन्होंने दोपहर बाद करीब दो बजे एक जगरानी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
मंजूर अहमद ने उर्दू का मसाला, कॉलेज गर्ल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और शहर-ए-सितम जैसे कई पुस्तकें लिखी थीं।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में बतौर प्रोफेसर भी अपनी सेवाएं दी हैं। वह उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी के अध्यक्ष भी रहे हैं। एक प्राइमरी टीचर के घर जन्मे मंजूर अहमद अपनी गजलों और नज्मों के बदौलत हमेशा लोगों के दिलों में राज करते रहेंगे।
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