प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ को झटका लगता हुआ नजर आ रहा है। दरअसल, पीएम मोदी ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन में ‘मेक इन इंडिया’ का नारा दिया गया था, लेकिन जो हकीकत सामने आ रही है उससे लगता है कि इस नारे से सरकार काफी दूर है।
(AFP File Photo)दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जापानी स्टील और इंजीनियरिंग कंपनियों के पास करीब 17 अरब डॉलर यानी 1.1 लाख करोड़ रुपए के भारतीय बुलेट ट्रेन में बड़ा सौदा हासिल है। इसका मतलब यह हुआ कि भारतीय कंपनियों को इसमें कुछ खास नहीं मिला।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से नवभारत टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि 17 अरब डॉलर यानी करीब 1,08,535 करोड़ रुपये के बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के लिए कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की रेस में जापान की स्टील और इंजिनियरिंग कंपनियां आगे हैं। इसे पीएम मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पॉलिसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले पांच सूत्रों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की सबसे अधिक फंडिंग जापान की ओर से ही हो रही है और रेल लाइन के लिए कम से कम 70 प्रतिशत स्टील की सप्लाइ भी जापानी कंपनियों की ओर से ही की जा सकती है। इस मामले में पीएम मोदी के कार्यालय के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। इस रिपोर्ट को ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने भी प्रकाशित किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जापान के परिवहन मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि दोनों देश फिलहाल जरूरी सामान की सप्लाइ लेकर बातचीत कर रहे हैं। जुलाई तक इस बारे में पूरे प्लान की जानकारी सामने आ सकेगी। बता दें कि सितंबर 2017 में भारत और जापान के बीच बुलेट ट्रेन को लेकर हुए समझौतों में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रसार और ‘तकनीक का आदान-प्रदान’ का प्रावधान शामिल था।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का मानना था कि तकनीक के हस्तांतरण के चलते भारत में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित की जा सकेगी और इससे देश में नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे। इसके अलावा तकनीक के लिहाज से भी भारत समृद्ध और मजबूत हो सकेगा। लेकिन अगर इस परियोजना का 70 फीसदी ठेका जापानी कंपनियां पाने में कामयाब हो जाती हैं को यह भारत के लिए झटका होगा।