कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार की स्थिरता को लेकर फिर एक बार सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को गठबंधन सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब कांग्रेस के दो विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आनंद सिंह के बाद अब कांग्रेस के एक और विधायक रमेश जारकीहोली ने भी राज्य विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
@INCIndiaइससे पहले कांग्रेस नेता आनंद सिंह ने विधानसभा की सदस्यता का इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा था। कर्नाटक में विजयनगर से कांग्रेस विधायक आनंद सिंह ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे 13 माह पुरानी जनता दल (सेक्युलर)-कांग्रेस बठबंधन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कर्नाटक में मचे सियासी ड्रामा और ज्यादा तेज होने के आसार नजर आ रहे हैं।
Karnataka Congress MLA Ramesh Jarkiholi resigns from state assembly membership; submits his resignation to the Speaker. (File pic) pic.twitter.com/BplKtiyCKd
— ANI (@ANI) July 1, 2019
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस और जद (एस) के कुछ और विधायकों का इस्तीफा देने की योजना है। इससे राज्य की एचडी कुमारस्वामी नीत जदएस-कांग्रेस सरकार की परेशानियां बढ़ सकती हैं। पिछले माह कर्नाटक जद (एस) प्रमुख एच. विश्वनाथ ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
Karnataka: Congress' Anand Singh submitted his resignation to the Governor from his assembly membership today. pic.twitter.com/UdHr6JOckz
— ANI (@ANI) July 1, 2019
मुख्यमंत्री एच डी कुमारास्वामी की अनुपस्थिति में यह सारा खेल हो रहा है। 8 जुलाई को वे अमेरिका से वापस आएंगे। कुछ दिनों पहले ही भाजपा से बचाकर कांग्रेस विधायकों को एक रिसॉर्ट में रखा गया था जहां आनंद सिंह को उनके पार्टी के एक अन्य सदस्य कांपली गणेश ने परेशान किया। आनंद सिंह पिछले साल ‘ऑपरेशन कमल’ में पकड़े गए भाजपा विधायकों में से एक थे।
कांग्रेस विधायक आनंद सिंह के इस्तीफे पर कर्नाटक के मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, ‘निश्चित रूप से, यह मेरे लिए चौंकाने वाला है, मैं उन्हें ट्रेस करने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन ट्रेस नहीं कर पा रहा। मुझे स्पीकर के साथ चेक करना होगा कि यह सच है या नहीं।’
बताया जाता है कि विश्वनाथ उपेक्षा किए जाने और पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों में विश्वास में नहीं लिए जाने को लेकर कथित रूप से नाखुश थे। वह गठबंधन सरकार के कामकाज को लेकर भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया से सार्वजनिक तौर पर उलझ गए थे। लोकसभा चुनाव में कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। पार्टी को 28 में से 25 सीटें मिलीं।
सत्तारूढ़ जद(एस) और कांग्रेस के खाते में सिर्फ एक-एक सीट गई थी। कांग्रेस और जद (एस) ने राज्य में लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन सीटों के बंटवारे का समझौता दोनों पार्टियों के सदस्यों में मतभेदों के बीच हुआ था। लोकसभा चुनावों में गठबंधन की हार होने के बाद कांग्रेस और जेडी-एस के बीच मतभेद गहरे हो गए हैं।