अभिनेता-हास्य अभिनेता कपिल शर्मा पद्मावती विवाद पर दीपिका पादुकोण के बचाव में कूद पड़े है जो दक्षिणपंथी समूहों द्वारा दीपिका की अगली रिलीज पद्मावती के प्रर्दशन को लेकर हमला बोल रहा है।
समाचार एजेंसी PTI से बात करते हुए, 36 वर्षीय कॉमेडियन कपिल शर्मा ने कहा, एक ओर तो आप कहते हैं कि दीपिका राष्ट्रीय गौरव है और फिर आप महिला सशक्तिकरण के बारे में बात करते हो लेकिन मुझे लगता है कि यह सभी को महसूस हो रहा है कि यह (धमकियां) मिलना गलत हैं।
कपिल अपनी आने वाली फिल्म ‘फिरंगी’ का प्रचार करने राजधानी दिल्ली थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोग अपनी बात रख सकते हैं लेकिन धमकी नहीं दे सकते।
कपिल शर्मा ने कहा, “हर किसी को ये हक है कि वो अपनी राय व्यक्त करे और किसी चीज पर असहमति जताते हुए प्रोटेस्ट करे। लेकिन जान से मारने की धमकी देना गलत है।”
पद्मावती’ की रिलीज की तारीख आगे बढ़ने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मामला सेंसर बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है। अंतिम निर्णय सेंसर बोर्ड को ही लेना है। अगर उन्हें इसमें कुछ आपत्तिजनक लगेगा तो उन्हें इसके बारे में फैसला करना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में पार्टी लाइन से अलग अपने विवादित बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘पद्मावती’ के विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बॉलिवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की चुप्पी पर सवाल उठाया था।
बिहार से बीजेपी सांसद व मशहूर बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने बुधवार (22 नवंबर) को ट्वीट कर लिखा कि, पद्मावती एक ज्वलंत मुद्दा बन गया है, लोग पूछ रहे हैं कि महान अभिनेता अमिताभ बच्चन, सबसे बहुमुखी अभिनेता आमिर खान और सबसे लोकप्रिय अभिनेता शाहरुख खान की इस पर कोई टिप्पणी क्यों नहीं आई है। और हमारे सूचना प्रसारण मंत्री और हमारे सबसे लोकप्रिय माननीय प्रधानमंत्री (पीईडब्ल्यू के अनुसार-अमेरिकन थिंक टैंक पीईडब्ल्यू पोल) इस पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।
बता दें कि, फिल्ममेकर द्वारा ‘पद्मावती’ की रिलीज स्थगित किए जाने के बाद सोमवार को तीन राज्यों को मुख्यमंत्री भी इस विवाद का हिस्सा बन गए। जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया, वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राजपूत समुदाय की आपत्तियों का समर्थन किया।
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विवाद को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धवस्त करने की एक ‘सोची समझी योजना’ बताया।